होलाष्टक आज से, 24 मार्च को होलिका दहन के दिन होगा समापन- प्रशांत मिश्र

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सोनभद्र (अरविंद दुबे, गिरीश तिवारी)

इस वर्ष आज 17 मार्च से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है। इसका समापन होलिका दहन के दिन 24 मार्च को होगा। आचार्य प्रशान्त मिश्र ने बताया कि रंगों का त्योहार होली से आठ दिन पहले यानी फाल्गुन मास के अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू हो जाता है और समापन पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन के दिन होता है। होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ कार्य करना अशुभ माना जाता है‌, क्योंकि इन कार्यों पर उग्र ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। होली के पर्व से शुभ कार्यों को पुनः शुरू किया जाता है। ‘होलाष्टक’ होली और अष्टक शब्द से मिलकर बना है। होलाष्टक के विषय में ऐसी मान्यता है है कि जब भगवान भोलेनाथ ने क्रोध में आकर काम देव को भस्म कर दिया था, तो उस दिन से होलाष्टक की शुरुआत हुई थी। साथ ही होलाष्टक की एक कथा हिरण्यकश्यपु और प्रह्लाद से संबंध रखती है। होलाष्टक इन्हीं आठ दिनों की एक लम्बी आध्यात्मिक क्रिया का केन्द्र बनता है जो साधक को ज्ञान की परकाष्ठा तक पहुंचाती है।

होलाष्टक में क्या करें ?
होलाष्टक के समय अपने आराध्य देवी-देवता की साधना के लिए अति उत्तम माना गया है. इस दौरान ईश्वर की भक्ति करते समय ब्रह्मचर्य का पूरी तरह से पालन करना चाहिए। होलाष्टक के दौरान तीर्थ स्थान पर स्नान और दान का बहुत महत्व है। होलाष्टक में पूरे समय में भगवान शिव शंकर के साथ-साथ भगवान श्री विष्णु की उपासना की जाती है। जीवन में आ रही परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए होलाष्टक में भगवान विष्णु के अवतार, नरसिंह भगवान की पूजा करनी चाहिए।

होलाष्टक में क्या न करें
होलाष्टक के आठ दिन किसी भी मांगलिक शुभ कार्य को करने के लिए शुभ नहीं माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, होलाष्टक शुरू होने के साथ ही 16 संस्कार जैसे नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार जैसे शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। खानपान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए, संतुलित और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। समय पर भोजन करना चाहिए और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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