सोनभद्र (AKD/गिरीश तिवारी)-आठ वर्ष पहले सोनभद्र मुख्यालय में एक किशोरी की संदिग्ध खुदकुशी से शुरू हुआ मामला आखिरकार चित्रकूट में तैनात सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर रामभवन तक जा पहुंचा। सीबीआई कई महीनों से उसकी तलाश में जुटी थी, लेकिन जांच को निर्णायक दिशा तब मिली जब 25 सितंबर को अनपरा, सोनभद्र से इंजीनियर नीरज कुमार को गिरफ्तार किया गया।बताया गया कि वर्ष 2012 में सोनभद्र की एक किशोरी ने आत्महत्या कर ली थी। आरोप था कि उसका अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया गया, लेकिन उस समय मामला पुलिस में दर्ज नहीं हो सका। परिजनों की मांग पर सीबीआई ने ऑनलाइन अश्लील वीडियो अपलोड कर कमाई करने वाले नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच शुरू की। इसी कड़ी में अनपरा से नीरज कुमार की गिरफ्तारी हुई, जिसके पास से मिले डिजिटल साक्ष्यों में रामभवन का ई-मेल, मोबाइल नंबर और कई संदेश मिले। इसके बाद जांच टीम चित्रकूट पहुंची और पूरा मामला खुलता चला गया।सीबीआई की विशेष इकाई, जो ऑनलाइन बाल यौन शोषण और शोषण सामग्री की मॉनिटरिंग करती है, ने गहन छानबीन के बाद दो नवंबर 2020 को रामभवन को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि वह करीब दस वर्षों से नाबालिग बच्चों का यौन शोषण कर उनके अश्लील वीडियो बनाता और अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों पर अपलोड कर बेचता था। आरोप है कि उसने 33 से अधिक बच्चों को अपना शिकार बनाया। उसके चित्रकूट स्थित आवास से करीब आठ लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन, लैपटॉप, वेब कैमरा, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने एसडीएम कॉलोनी और सिंचाई विभाग कार्यालय के आसपास के कई लोगों को सर्विलांस में लेकर पूछताछ की। विभाग के कुछ कर्मचारियों और स्थानीय लोगों से भी जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान मोहल्ले में दहशत का माहौल रहा।रामभवन लंबे समय से चित्रकूट में तैनात था और विभागीय कॉलोनी के बजाय किराये के मकान में रहना पसंद करता था। आरोप है कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में ड्यूटी के बहाने रेस्ट हाउस में रुकता और वहीं अपने अपराध को अंजाम देता था। उसकी पत्नी दुर्गावती की संलिप्तता की भी जांच में बात सामने आई, जिस पर बच्चों को बुलाने और विरोध होने पर दरवाजा बंद करने में मदद करने का आरोप लगा।स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बुंदेलखंड क्षेत्र में गरीबी का फायदा उठाकर ऐसे अपराधी मासूमों को जाल में फंसाते रहे हैं, लेकिन यह मामला तब खुला जब सोनभद्र की पुरानी घटना से जुड़े डिजिटल सुराग सीबीआई के हाथ लगे।इस पूरे घटनाक्रम ने सोनभद्र से लेकर चित्रकूट और बांदा तक लोगों को झकझोर दिया। वर्षों तक दबे रहे इस मामले में डिजिटल जांच और अंतरराज्यीय समन्वय के बाद सच्चाई सामने आई, जिसने समाज को यह संदेश दिया कि ऑनलाइन अपराध भले ही छिपे हों, लेकिन कानून की पकड़ से बच पाना आसान नहीं है।
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