AKD/गिरीश तिवारी
सोनभद्र। खनिज संपदा से भरपूर जिले में राख और कोयला परिवहन लगातार जारी है, लेकिन इसमें हो रही खुली लापरवाही अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। हाल ही में हुई दुर्घटनाओं और विरोध के बावजूद परिवहन पर कोई असर नहीं पड़ा और नियमों को ताक पर रखकर काम बदस्तूर चलता रहा। इस सप्ताह ही ओवरलोड और नियमों की अनदेखी के चलते दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की जान जा चुकी है, जिससे जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।सड़कों पर दौड़ रही राख से लदी हाइवा गाड़ियां अब खतरे का कारण बन चुकी हैं। इन गाड़ियों से लगातार गिर रहा पानी और राख मिश्रित स्लरी सड़कों को बेहद फिसलन भरा बना रही है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए हर सफर जोखिम भरा हो गया है। जरा सी चूक सीधे हादसे में बदल रही है और यही अब इन इलाकों की सच्चाई बन चुकी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि अनपरा और शक्तिनगर के आसपास राख परिवहन में भारी अनियमितताएं हैं। ओवरलोडिंग आम हो चुकी है, गाड़ियों को सही तरीके से ढंका नहीं जाता और रास्ते भर पानी बहता रहता है। लोगों ने कई बार विरोध कर प्रशासन को चेताया, ज्ञापन सौंपा और नियमों के तहत परिवहन कराने की मांग की, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहा।सिर्फ राख ही नहीं, बल्कि कोयला, गिट्टी और बालू से लदे ओवरलोड वाहन भी बिना किसी रोकटोक के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। हाल ही में कोयला और राख परिवहन से जुड़ी घटनाओं में दो लोगों की मौत के बाद भी सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही जस की तस बनी हुई है।ऐसे हालात में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक यह मौत का खेल चलता रहेगा और कब जिम्मेदार विभाग जागेंगे। सड़कों पर चलने वाले आम लोगों की सुरक्षा फिलहाल भगवान भरोसे नजर आ रही है, जबकि सामने आ रही तस्वीरें साफ चेतावनी दे रही हैं कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं।
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