उत्तर प्रदेश के चार जिलों के जिलाधिकारियों को जल संरक्षण में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए सम्मानित करने की घोषणा की गई है। ये जिले और उनके जिलाधिकारी हैं
मिर्जापुर: आईएएस पवन गंगवार
वाराणसी: आईएएस सतेंद्र सिंह
जालौन: आईएएस राजेश पांडेय
चित्रकूट: आईएएस शिव शरणप्पा जी.एन.
इन अधिकारियों ने जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में न केवल गति दी, बल्कि स्थानीय जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित की। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है, जिसमें राज्य को जल प्रबंधन और जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कार से नवाजा गया है। राज्य में 27,368 पारंपरिक जल निकायों का पुनरोद्धार किया गया और 17,279 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया गया। इसके अलावा 31,360 सरकारी भवनों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण किया गया। यह जानकारी जल संरक्षण और विकास कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को पुरस्कार राशि प्रदान करने के संबंध में है। मिर्जापुर, वाराणसी और जालौन को 2-2 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी, जबकि चित्रकूट को 1 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। यह राशि इन जिलों में जल संरक्षण और विकास कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी। राज्य स्तर पर पुरस्कार के लिए जिला स्तरीय समिति द्वारा चयन किया जाएगा और पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। यह पहल जल संरक्षण और विकास कार्यों को बढ़ावा देने और समुदायों को जल संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करने में मदद करेगी
जालौन के जिलाधिकारी राजेश पांडेय को जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने जन भागीदारी से जल संरक्षण का एक अनोखा मॉडल विकसित किया है, जिसमें चेकडैम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्य शामिल हैं। इन प्रयासों से क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई की समस्या काफी हद तक कम हुई है।
जालौन में जल संरक्षण के कार्य
नून नदी का पुनर्जीवन: कोंच तहसील के ग्राम सतोह से निकलने वाली 83 किलोमीटर लंबी नून नदी को नया जीवन मिला है। नदी के पुनर्जीवन से क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है।
चेकडैम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग: जल संरक्षण के लिए चेकडैम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्य किए गए हैं। इन प्रयासों से क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई की समस्या कम हुई है।
जन भागीदारी: जल संरक्षण के कार्यों में जन भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है। इससे लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
पुरस्कार और सम्मान
जालौन जिले को जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए 2 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। जिलाधिकारी राजेश पांडेय को दिल्ली में आयोजित होने वाले समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
अन्य जिले जिन्हें पुरस्कार मिला है
मिर्जापुर और वाराणसी को भी 2-2 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। चित्रकूट को 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जिलों को पुरस्कृत कर रही है, जिससे अन्य जिलों को भी प्रेरणा मिल सके। मिर्जापुर, वाराणसी और जालौन को 2-2 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी, जबकि चित्रकूट को 1 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
जल संरक्षण के प्रयास
उत्तर प्रदेश सरकार जल संरक्षण को लेकर व्यापक जन अभियान चला रही है, जिसमें स्कूली बच्चों और शिक्षकों की भागीदारी शामिल होगी। 300 भूजल रैलियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे जल संसाधनों के प्रति दीर्घकालिक चेतना विकसित की जा सके। जल संचय को समाज में प्रोत्साहित करने और भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जन-जागरूकता और सामूहिक प्रयासों को बल मिलेगा।
जल संरक्षण में सफलता
छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण में इतिहास रचा है, जहां रायपुर ने राष्ट्रीय जल संचय और जन भागीदारी में पहला स्थान प्राप्त किया है। उत्तर प्रदेश भी जल संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, जिसमें जल संचयन और भूजल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भविष्य की दिशा
जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जाएगा, जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिल सके। उत्तर प्रदेश सरकार जल संरक्षण को लेकर चल रहे अभियान को और अधिक सशक्त करेगी, जिससे जल संकट को दूर करने में मदद मिल सके।
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