खदान हादसे में एसआईटी की बड़ी कार्रवाई,खदान में दबाव, लापरवाही और अवैध ड्रिलिंग का पूरा सच उजागर

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ओबरा/सोनभद्र(AKD/गिरीश तिवारी)-बिल्ली मारकुंडी स्थित मेसर्स कृष्णा माइनिंग वर्क्स की खदान में 15 नवंबर को हुए भीषण हादसे की जांच में आज निर्णायक मोड़ आया, जब पुलिस अधीक्षक सोनभद्र के निर्देश पर गठित एसआईटी टीम ने हादसे की जड़ में छिपी खतरनाक लापरवाहियों को उजागर करते हुए माइन्स मैनेजर अनिल कुमार झा, माइन्स स्टाफ अजय कुमार, माइन्स मेट चन्द्रशेखर और माइन्स स्टाफ गौरव सिंह को गिरफ्तार कर लिया। यह वही हादसा है, जिसमें ड्रिलिंग के दौरान पहाड़ी का विशाल हिस्सा अचानक ढह गया था और सात मजदूरों की दर्दनाक मौत हुई थी।एसआईटी जांच में सामने आया कि खदान में ड्रिलिंग और विस्फोटक मानकों का न सिर्फ उल्लंघन किया जा रहा था, बल्कि मजदूरों को बिना सुरक्षा साधनों के खतरनाक ढलानों पर काम करने के लिए भेजा गया। मजदूरों ने नीचे उतरकर कार्य करने से इनकार किया था, फिर भी मालिकों और ठेकेदारों के दबाव में माइन्स मैनेजर अनिल कुमार झा और माइन्स मेट चन्द्रशेखर ने न तो कार्य रोका और न ही इस गंभीर स्थिति की सूचना खान सुरक्षा निदेशालय या उच्चाधिकारियों को दी।

माइन्स स्टाफ अजय कुमार और गौरव सिंह भी इसी कार्य में सहयोग करते पाए गए। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि मानक से अधिक गहराई और गलत तरीके से की गई ड्रिलिंग ने पहाड़ी की संरचना को कमजोर कर दिया था। इसी अनियंत्रित ड्रिलिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण भारी चट्टान अचानक टूटकर मजदूरों पर गिर गई, जिससे सातों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। पूछताछ में माइन्स मैनेजर और मेट ने स्वीकार किया कि खदान में अनियमितताएँ लगातार चल रही थीं, लेकिन उन्होंने न इन्हें रिपोर्ट किया और न ही किसी प्रकार की सावधानी बरती।एसआईटी द्वारा एकत्र किए गए तकनीकी साक्ष्यों, बयान और स्थल परीक्षण में यह स्पष्ट सिद्ध हुआ कि दुर्घटना प्राकृतिक कारण से नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही, कर्तव्यच्युति और सुरक्षा नियमों के खुले उल्लंघन का परिणाम थी। इसी आधार पर चारों अभियुक्तों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

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