दलित महिला से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन दोषियों को उम्रकैद

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AKD।गिरीश तिवारी

सोनभद्र। करीब साढ़े 11 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट आबिद शमीम की अदालत ने बुधवार को तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों पर 60–60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर प्रत्येक दोषी को छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अर्थदंड की कुल राशि में से 90 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे।मामला करमा थाना क्षेत्र के एक गांव का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 22 जुलाई 2014 को पीड़िता के घर नंदलाल, कांग्रेस और विनय सिंह नामक व्यक्ति मैजिक वाहन से पहुंचे और बताया कि उसका पति दुर्घटना में घायल हो गया है तथा उसे करमा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने महिला से कुछ पैसे लेकर साथ चलने को कहा। आरोप है कि महिला उनके झांसे में आकर घर से आठ हजार रुपये लेकर उनके साथ चली गई।बताया गया कि रास्ते में आरोपी उसे एक विद्यालय में ले गए। वहां पहुंचने पर महिला ने कारण पूछा तो आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और अकेला पाकर बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपियों ने किसी से शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी और महिला को वहीं छोड़कर फरार हो गए।पीड़िता ने इस घटना की सूचना करमा थाने में दी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत भेजी। इसके बाद अदालत के आदेश पर 5 सितंबर 2014 को तीनों आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म, लूट और एससी/एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी द्वारा की गई और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर तीनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, छह गवाहों के बयान और साक्ष्यों का अवलोकन किया। इसके बाद तीनों आरोपियों नंदलाल, कांग्रेस और विनय सिंह को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता सी. शशांक शेखर कात्यायन ने पैरवी की।

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