
रवि सिंह
दुद्धी (सोनभद्र)। तहसील दुद्धी में तैनात उप जिलाधिकारी (न्यायिक) मोहम्मद जफर की कार्यप्रणाली को लेकर सिविल बार एसोसिएशन एवं सिविल बार एसोसिएशन दुद्धी के अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। अधिवक्ताओं के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोनभद्र के जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से मुलाकात कर एक गंभीर शिकायती पत्र सौंपा, जिसमें न्यायिक नियमों व प्रक्रियाओं की धज्जियां उड़ाने और मनमाने ढंग से त्रुटिपूर्ण एकपक्षीय आदेश पारित करने के आरोप लगाए गए हैं।सौपे गए ज्ञापन में बार एसोसिएशन के सम्मानित सदस्यों ने साक्ष्यों व दस्तावेजों के हवाले से बताया कि न्यायिक एसडीएम द्वारा वादकारियों की पत्रावलियों में सुनवाई और विचारण के लिए तय तिथियों पर बिना पुकार कराए ही खेल खेला जा रहा है। पत्रावली में सादे बारकोड के आदेश पत्र पर सीधे अगली तारीख दर्ज कर दी जाती है और उस पर वादकारियों व उनके अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर करवा कर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। हद तो तब हो जाती है जब नियत तारीख पर जब वादकारी अपना दूसरा पक्ष रखने अदालत पहुंचते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि पूर्व में हस्ताक्षर होने के बावजूद सादे आदेश पत्र पर नियम विरुद्ध तरीके से “पुकार कराए जाने, पक्षों को सुने जाने तथा पत्रावली का अवलोकन कर गुण-दोष के आधार पर वाद खारिज कर देने” का झूठा आदेश अंकित कर दिया गया है।जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से मुलाकात के दौरान अधिवक्ताओं का पक्ष मजबूती से रखने के लिए दुद्धी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण पाण्डेय, प्रेमचंद यादव तथा जितेंद्र श्रीवास्तव मुख्य रूप से शामिल रहे। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने डीएम को बताया कि पीठासीन अधिकारी द्वारा पद व हैसियत का दुरुपयोग कर जानबूझकर वादकारियों के साथ धोखा और छल किया जा रहा है। इस अजीबोगरीब और त्रुटिपूर्ण कार्यशैली से जनता को नियमानुसार मिलने वाले न्याय से वंचित किया जा रहा है, जिससे प्रभावित वादकारियों में शासन व सरकार की न्यायिक व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष, आक्रोश और निराशा की भावना पैदा हो रही है।
उच्च स्तरीय जांच और आदेश निरस्त करने की मांग-
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से पुरजोर मांग की है कि मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, न्यायिक नियमों व मंशा के विरुद्ध मनमाने ढंग से पारित किए गए सभी त्रुटिपूर्ण व एकपक्षीय आदेशों को तत्काल निरस्त कर पीड़ित वादकारियों को न्याय दिलाया जाए।
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