
डाला।सोनभद्र- सरकारी व्यवस्था में निरीक्षण का अपना महत्व है। अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, परिस्थितियों का जायजा लेते हैं और फिर तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होती है। मगर जब निरीक्षण के बाद भी नतीजों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने न आए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र के लंगड़ा मोड़ पर खान विभाग के हालिया दौरे के बाद भी कुछ ऐसे ही सवाल चर्चा में हैं। जिले के खनिज विभाग के अधिकारी कमल कश्यप अपनी टीम के साथ मंगलवार की सायं लगभग 4:30 पर निरीक्षण के लिए पहुंचे और एक क्रेशर प्लांट का मौका मुआयना किया। दौरे के दौरान जब निरीक्षण और संभावित कार्रवाई को लेकर सवाल किए गए, तो अधिकारी की ओर से कहा गया कि खनन क्षेत्र हमारा है, हम कभी भी दौरा कर सकते हैं। हालांकि, निरीक्षण में क्या सामने आया और आगे क्या कार्रवाई होगी, इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। सवालों के जवाब में स्थिति स्पष्ट करने के बजाय बातचीत का रुख अधिकार क्षेत्र और दौरे तक ही सीमित नजर आया।
बात सही है साहब! खनन क्षेत्र विभाग के अधिकार क्षेत्र में है और निरीक्षण करना अधिकारियों का अधिकार भी है तथा जिम्मेदारी भी। लेकिन एक सवाल जनता की ओर से भी है,जब अधिकारी कभी भी दौरा कर सकते हैं, तो निरीक्षण के निष्कर्षों की जानकारी भी समय पर मिलनी चाहिए।

आखिर जनता यह जानने की अपेक्षा तो रखती है कि मौके पर क्या स्थिति मिली और जांच के बाद विभाग का अगला कदम क्या होगा। कुछ सूत्रों के हवाले से एक टीपर लदी गिट्टी और उससे संबंधित परिवहन दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा सामने आई है। वाहन पर लदी गिट्टी के परमिट की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि गिट्टी उसी प्लांट से लोड की गई थी। संबंधित वाहन के दस्तावेजों की जांच की गई तो उसमें क्या तथ्य सामने आए। यदि इस मामले में कोई सवाल या संदेह सामने आया है, तो संबंधित दस्तावेजों की नियमानुसार जांच कर स्थिति स्पष्ट करना विभाग के लिए महत्वपूर्ण होगा। दस्तावेज सही पाए जाने पर स्थिति सार्वजनिक की जा सकती है और यदि किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। खान अधिकारी कमल कश्यप से जब संभावित कार्रवाई के संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि कार्रवाई जो भी होगी, उसके बारे में बताया जाएगा। निरीक्षण के निष्कर्षों और संभावित कार्रवाई पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के बीच, सवालों का सिलसिला अपनी जगह बना हुआ है। मौके पर पहुंचे अधिकारी से जब तथ्यों को स्पष्ट करने की अपेक्षा की गई, तो जवाबों से तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो सकी।अब सवाल उठता है कि क्या निरीक्षण का उद्देश्य केवल मौके पर पहुंचकर स्थिति देखना है या उसके बाद सामने आए तथ्यों को स्पष्ट करना भी विभाग की जिम्मेदारी है? अधिकारी का दौरा करना अधिकार है, लेकिन जनता के सवालों का तथ्यपरक जवाब देना भी जवाबदेही का हिस्सा है।
सरकार खनन व्यवस्था में पारदर्शिता, नियमों के पालन और राजस्व की सुरक्षा पर जोर देती है। इन उद्देश्यों को जमीन पर उतारने में विभागीय अधिकारियों की भूमिका अहम है। ऐसे में अब निगाहें खान विभाग पर हैं। क्या निरीक्षण के निष्कर्षों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी? क्या टीपर वाहन से संबंधित चर्चा के तथ्यों की जांच होगी? और यदि किसी तरह की अनियमितता की पुष्टि होती है, तो क्या नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी ।
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