भारत के इस शिव मंदिर में होती है प्रतिमा की पूजा, जाने क्या है रहस्य

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भारत का एक ऐसा शिव मंदिर जहां होती है भगवान के प्रतिमा की पूजा, यह मंदिर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के घोरावल इलाके में भगवान शिव का ऐसा मंदिर भी है, जहां शिवलिंग की नहीं बल्कि साक्षात शिव-पार्वती की पूजा होती है। उमामहेश्वर का यह मंदिर शिव और पार्वती को समर्पित है। शिवद्वार धाम में भगवान शिव के साथ उनकी पत्नी देवी पार्वती भी विराजमान हैं। उमामहेश्वर की यह प्रतिमा ही अपने आप में अलग है। श्रद्धालु इनके दर्शन-पूजन से भगवान शिवशंकर और देवी पार्वती अपने भक्तों की मुरादें पूरी कर देते हैं। सावन के महीने में यहां पर हजारों की संख्या में कावड़िए शिवद्वार धाम जल चढ़ाने के लिए पहुंचते हैं। इस मंदिर को धार्मिक महत्व के कारण दूसरी काशी और गुप्त काशी के रूप में मानते हैं। चार राज्यों से सटा यह जिला हमेशा किंवदन्तियों रहस्यों और साधना का केन्द्र रहा है।

प्राकृतिक संपदा, रहस्य, मंदिर, पौराणिक और ऐतिहासिक किले, खूबसूरत झरने और रोमांचित कर देने वाली अविश्वनीय कथाओं की चर्चा शुरू होती है। सोनभद्र जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर घोरावल में उमामहेश्वर मन्दिर है, यह मंदिर शिव और पार्वती को समर्पित है। किंवदंतियों के अनुसार एक किसान के खेत में हल चलाने के दौरान उमामहेश्वर की अप्रतिम मृर्ति मिली थी। यह विशाल मंदिर भगवान शिव और उनकी पत्‍नी पार्वती को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भगृह में देवी पार्वती की 11 वीं सदी की काले पत्‍थर की मूर्ति स्थापित की गई है जो अपने आप में ही अद्भुत नजर आती है।काले पत्थर से निर्मित प्रतिमा करीब तीन फीट ऊंची और लश्या शैली में है। इसे सृजन का स्वरूप भी माना जाता है। यह विशाल प्रतिमा उस काल के शिल्‍प कौशल के बेहतरीन नमूने और शानदार कला का प्रदर्शन करता है। यह मंदिर क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। इस क्षेत्र के निवासी इस मंदिर को धार्मिक महत्‍व के कारण दूसरी काशी के रूप में मानते है। सोनभद्र के प्रसिद्ध शिवद्वार धाम में कांवड़ यात्रा आरंभ वर्ष 1986-87 में में हुआ। उस समय घोरावल इलाके के युवकों द्वारा मिर्जापुर के बरियाघाट से गंगा जल लाकर कांवड़ यात्रा की शुरुआत की गई थी। वही वर्ष 1991-92 में सोनभद्र जिले के विजयगढ़ किले के राम सागर पोखरे पवित्र जल लेकर कांवड़ यात्रा प्रारंभ कराया गया था। आज शिव भक्तों के लिए शिवद्वार धाम आस्था का केंद्र बन चुका है।यहां हर वर्ष सावन के महीने में हजारो की संख्या में श्रद्धालु कांवड़ियाँ जल लेकर शिवद्वार धाम तक की कांवड़ यात्रा करते हैं। यहाँ मंदिर परिसर में श्रद्धालु अपनी मनौतियाँ पूरी होने पर कथा के साथ-साथ मुंडन, शादी जैसे आयोजनों के लिए भी आते हैं।

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