सोनभद्र। बेलहत्थी बौद्ध विहार विपस्साना व साधना के लिए प्रकृति की गोद में धम्म साधको का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। उक्त बातें सारनाथ के बौद्ध भिक्षु भंते बुद्ध ज्योति जी ने बेलहत्थी के प्राकृतिक जल स्रोतों से जल आचमन करते हुए कही। भंते बुद्ध ज्योति ने बेलहत्थी बौद्ध विहार का निरीक्षण करते हुए कहा कि यह बौद्ध विहार इस धरती का सबसे खूबसूरत विहार है जो प्राकृतिक के गोद में बना है, यहां विपस्सना और साधना के लिए सर्वोत्तम माहौल है, इस योग क्रिया से व्यक्ति स्वयं की पहचान कर सकता है, और तथागत भगवान बुद्ध के मार्ग पर चल सकता है। विपासना योग मन को शांत एवं तनाव को कम करता है, धैर्य आत्मविश्वास को बढ़ाता है विचारों पर नियंत्रण मिलता है, मस्तिष्क को लचीलेपन को बढ़ावा मिलता है इससे, राग, भय, मोह, लालच द्वेष जैसे विकारों से मुक्ति मिलती है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और चेहरे पर चमक आती है। यह साधना शांत वातावरण और प्रकृति की गोद में ही की जा सकती है जिसके लिए बेलहत्थी बौद्ध विहार उपयुक्त है। बौद्ध बिहार के निरंतर बहने वाली प्राकृतिक जल स्रोत से भंते ने जल आचमन भी किया और औषधिय गुणों से मिश्रित जल को पीने और नहाने से निरोग काया होना बताया। भंते बुद्ध ज्योति जी ने बेलहत्थी बौद्ध विहार को भगवान गौतम बुद्ध की थाईलैंड से निर्मित प्रतिमा भी भेंट करने का वचन दिया है, और समय-समय पर बेलहत्थी बौद्ध बिहार पर आते रहने और यही पर रह कर साधना करने की भी बात कही है। भंते बौद्ध भिक्षु बुद्ध ज्योति जी के साथ भंते आनंद जी, भंते दीन बंधु तथा विकास शाक्य एडवोकेट पूर्व विधायक हरीराम चेरो, मंगल मौर्य सहित कई अन्य लोग रहे।
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