फूलों की होली के संग श्री मद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का हुआ विश्राम

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सोनभद्र। सदर विकास खण्ड के करारी गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन श्रीमद् भागवत का रसपान करने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। विन्ध्याचल से पधारे कथा व्यास परम् श्रद्धेय शारदानन्दन जी महाराज के सुमधुर वाणी से भागवत कथा के अंतिम दिन कई प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। इसमें वासुदेव नारद संवाद, सुदामा चरित्र प्रसंग, परीक्षित मोक्ष की कथा का बड़े ही रोचक अंदाज में वर्णन किया।भक्तमाल चरित्र में भक्त प्रहलाद व भक्त ध्रुव का प्रसंग सुनाते हुए निश्चल व निर्मल भक्ति करने का आह्वान किया। कथा के दौरान पूज्य महाराज श्री नें श्रोताओं को भागवत को अपने जीवन में उतारने की अपील की। भक्त की साधना से खुश होकर भगवान रीझ जाते हैं। उन्होने कहा कि कलयुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा। कलियुग में जीवन के सभी पापों से मुक्ति का एक मात्र आधार भगवान की भक्ति ही है। भगवान का नाम स्मरण करने से ही भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। भगवान नाम में भारी शक्ति है। साथ ही सुदामा चरित्र के माध्यम से श्रोताओं को श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल पेश की। समाज को समानता का संदेश दिया। इस अवसर पर पूज्य व्यास जी ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है, वहीं इस कथा को कराने वाले को भी अनन्त फल की प्राप्ति होती है। अंतिम दिन शुकदेव द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा का पूर्णता प्रदान करते हुए विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। महाराज श्री नें सात दिवस की कथा का सारांश बताते हुए कहा कि जीवन कई योनियों के बाद मिलता है और इसे कैसे जीना चाहिए के बारे में भी उपस्थित भक्तों को समझाया। सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाते हुए श्रीकृष्ण सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा की स्थिति को सुधारा। उन्होंने व्रत उपासना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई ईश्वर किसी से भूखे पेट रहकर भक्ति करने को नहीं कहते हैं। मन पर नियंत्रण और नाम जप ही इस जगत में पार लगाने के लिए काफी है। सुदामा की मनमोहक झांकियो का चित्रण किया गया जिसे देखकर हर कोई भाव विभोर हो उठा। अंत में श्री कृष्ण के दिव्य लोक पहुंचने का वर्णन विस्तार पूर्वक किया गया जिससे समस्त कथारसिक भक्त भाव विभोर हो उठे । इस अवसर पर यज्ञ के आचार्य प्रशान्त मिश्र, आचार्य वेदप्रकाश त्रिपाठी, आचार्य संजय चौबे, आशीष वैदिक सहित मुख्य यजमान श्री गिरधारी दूबे पत्नी सीता देवी एवं आयोजक श्री सदानन्द पाठक सच्चिदानंद पाठक संगीत के सुमधुर कलाकार एवं हजारों कि संख्या में भगवत्प्रेमी भक्तजन उपस्थित रहे !

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