सोनभद्र में अवैध खनन का तांडव, जिम्मेदारों की चुप्पी से गहराए सवाल

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सोनभद्र: (गिरीश तिवारी)-जिले में अवैध खनन का कारोबार बेलगाम हो चुका है। ओबरा तहसील के बिल्ली चढ़ाई और बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र की खदानों में दर्जनों पोकलेन मशीनें दिन-रात गर्जना कर रही हैं। लाखों रुपये के बोल्डर अवैध तरीके से निकाले जा रहे हैं और सैकड़ों ट्रक-टिपर लगातार सड़क पर दौड़ते हुए सरकारी राजस्व को चूना लगा रहे हैं।मेंसर्स अजंता माइंस एंड मिनरल्स का यह पट्टा है, लेकिन हकीकत यह है कि खनन स्वीकृत सीमा से कई गुना ज्यादा हो रहा है। तेज और अनियंत्रित ब्लास्टिंग से आसपास के घर तक हिलने लगे हैं। लोगों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई तक पर कभी जांच नहीं हुई। मानकों से कई गुना अधिक बारूद खपाने का आरोप भी स्थानीय लोगों ने लगाया है।खनन पट्टे से जुड़े सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय यादव और पूर्व विधायक के भाई संजय दूबे के नाम सामने आने से यह मामला और पेचीदा हो गया है। लोगों का कहना है कि इन्हीं रसूखदार चेहरों के दबाव के चलते अधिकारी कार्रवाई से बचते हैं। खनन विभाग केवल जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है और प्रशासन खामोशी ओढ़कर बैठा है।प्रदेश सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती है, लेकिन सोनभद्र में तस्वीर बिल्कुल अलग है। दर्जनों मशीनें, लगातार ट्रकों की आवाजाही और रातभर चलने वाली गतिविधियां आखिर प्रशासन की नजर से कैसे बच रही हैं? यही खामोशी अवैध कारोबार को संरक्षण देने का खुला सबूत बन चुकी है।स्थानीय लोगों की चेतावनी है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उस वक्त जिम्मेदारी तय होने से पहले ही मासूमों की जान जा चुकी होगी। सोनभद्र में अवैध खनन का यह तांडव न केवल कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहा है बल्कि सरकार की साख पर भी गहरे सवाल खड़े कर रहा है।


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