दीपावली विशेष: जो भी करेंगा तीन दिनों में दीपदान उसे नहीं झेलनी पड़ेगी यह यातना….

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रिपोर्ट पब्लिक भारत

कार्तिक मास के कृष्णपक्ष चतुर्दशी ‘नरक चतुर्दशी’ कहलाती है। कथा-वामनावतार में भगवान् श्रीहरिने सम्पूर्ण पृथ्वी नाप ली। बलिके दान और भक्ति से प्रसन्न होकर वामन भगवान्ने उनसे वर माँगने को कहा। उस समय बलिने प्रार्थना की कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी सहित इन तीन दिनों में मेरे राज्य का जो भी व्यक्ति यमराज के उद्देश्य से दीपदान करे, उसे यमयातना न हो और इन तीन दिनों में दीपावली मनाने वाले का घर लक्ष्मीजी कभी न छोड़ें। भगवान्ने कहा-‘एवमस्तु। जो मनुष्य इन तीन दिनों में दीपोत्सव करेगा, उसे छोड़कर मेरी प्रिया लक्ष्मी कहीं नहीं जायेंगी। आपको बता दें की सनत्कुमार संहिता के अनुसार इसे पूर्वविद्धा लेना चाहिये। इस दिन अरुणोदयसे पूर्व प्रत्यूष काल में खान करने से मनुष्य को यमलोक का दर्शन नहीं करना पड़ता।

यद्यपि कार्तिक मास में तेल नहीं लगाना चाहिये, फिर भी इस तिथि विशेष को शरीरमें तेल लगाकर खान करना चाहिये। जो व्यक्ति इस दिन सूर्योदय के बाद खान करता है, उसके शुभकार्यों का नाश हो जाता है। मृानसे पूर्व शरीरपर अपामार्ग का भी प्रोक्षण करना चाहिये। अपामार्गको निम्न मन्त्र पढ़कर संस्तकपर घुमाना चाहिये। इससे नरक का भय नहीं रहता। खान करने के बाद शुद्ध वस्त्र पहनकर, तिलक लगाकर दक्षिणा भिमुख हो निम्न नाममन्त्रोंसे प्रत्येक नामसे तिलयुक्त तीन-तीन जलाञ्जलि देनी चाहिये। यह यम-तर्पण कहलाता है। इससे वर्षभरके पाप नष्ट हो जाते हैं।

सितालोष्ठसमायुक्तं, सकण्टकदलान्वितम् ।

हर पापमपामार्ग धाम्यमाणः पुनः पुनः ॥

ॐ यमाय नमः’, ‘ॐ धर्मराजाय नमः, ॐ मृत्यवे नमः ॐ अन्तकाय नमः’, ‘ॐ वैवस्वताय नमः’, ‘ॐ कालाय नमः ॐ सर्वभूतलयाय नमः, ॐ औदुम्बराय नमः ॐ दक्षाय नमः’, ‘ॐ नीलाय नमः’, ‘ॐ परमेष्ठिने नमः ॐ वृकोदराय नमः’ ‘ॐ चित्राय नमः’, ‘ चित्रगुमाय नमः’।

इस दिन देवताओंका पूजन करके दीपदान करना चाहिये। मन्दिरों, गुप्तगृहों, रसोईघर, खानघर, देववृक्षोंके नीचे, सभाभवन, नदियोंके किनारे, चहारदीवारी, बगीचे, बावली, गली-कूचे, गोशाला आदि प्रत्येक स्थानपर दीपक जलाना चाहिये। यमराजके उद्देश्यसे त्रयोदशीसे अमावास्यातक दीप जलाने चाहिये।

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