मजदूरों की जान से ज्यादा कीमत इसकी की?…..

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पब्लिक भारत

सोनभद्र। जिले का खनन क्षेत्र जहाँ पत्थरों से ज्यादा जानें टूट रही हैं। 15 नवंबर को खदान धंसने से 7 मजदूरों की दर्दनाक मौत हुई हादसे के बाद 36 खदानों पर ताला लगा। सुरक्षा के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें हुईं लेकिन अब वही खदानें फिर से गरज रही हैं। खान सुरक्षा निदेशालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सुधारात्मक कार्य की आड़ में अंधाधुंध खनन शुरू कर दिया गया है। सवाल सीधा है क्या मजदूरों की जान से ज्यादा कीमती खनिज का दाम है? कमिश्नर ने माना कि खनिज उत्पादों के दाम बढ़ने की एक वजह नियमों में ढिलाई भी है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी कह रही है। आख़िर जिम्मेदारी किसकी? और अगला हादसा रोकने की गारंटी कौन देगा?

इतनी खादानों पर लगी थी रोक

सोनभद्र। जिले के बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में 15 नवंबर को हुए खदान धसकने की घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। मेसर्स कृष्णा माइनिंग वर्क्स में नियमों की खुली अनदेखी के बीच हुए इस हादसे में 7 मजदूरों की मौत हो गई। इसके बाद खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने 36 असुरक्षित खदानों के संचालन पर रोक लगा दी थी। लेकिन कुछ ही हफ्तों में हालात बदल गए। पट्टाधारकों ने सुधारात्मक कार्यों की अनुमति ली पर ज़मीनी तस्वीर बताती है कि सुधार कम, खनन ज्यादा हो रहा है। उप निदेशक, वाराणसी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद कई स्थानों पर मशीनें फिर से गरजने लगी हैं। नियमों की अनदेखी और जल्दबाज़ी ने एक बार फिर खतरे की घंटी बजा दी है।

यहां हो रहीं अनिययमितता

सोनभद्र।  गंगा स्टोन वर्क्स और प्रशासनिक सवाल हादसे वाली कृष्णा माइनिंग वर्क्स से सटी गंगा स्टोन वर्क्स भी असुरक्षित घोषित की गई थी। उसे भी केवल सुधारात्मक कार्य की अनुमति मिली थी, लेकिन मौके पर खनन फिर से शुरू हो चुका है। खनन क्षेत्र में यह खुली गतिविधि न सिर्फ सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सूबे की कानून व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है। मिर्जापुर विंध्याचल मंडल के कमिश्नर राजेश प्रसाद ने जिले के दौरे के दौरान कहा कि खनिज उत्पादों के दाम बढ़ने के पीछे खदानों का बंद होना भी एक वजह है। उन्होंने बताया कि DGMS की शर्तों के तहत 8 खदानों को खोलने की अनुमति मिल चुकी है और बाकी को भी खोलने का अनुरोध किया गया है। कमिश्नर ने भरोसा दिलाया कि सुरक्षा से समझौता नहीं होगा। लेकिन ज़मीनी हालात इस दावे की पुष्टि नहीं करते।

जाने क्या बोले जिम्मेदार

सोनभद्र। मिर्ज़ापुर विंध्याचल मंडल के कमिश्नर राजेश प्रकाश का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षा के लिए टीमें गठित हैं और समय-समय पर निरीक्षण होता है। उनका दावा है कि सुरक्षा मानकों को पूरा करते हुए खनन कराया जाएगा और अनियमितता पर कार्रवाई होगी। लेकिन बड़ा सवाल अभी भी जस का तस है क्या खदानों में सुरक्षा पहले आएगी या उत्पादन? क्या मजदूरों की जिंदगी का मोल तय होगा बाजार के भाव से? सोनभद्र का खनन क्षेत्र फिर सक्रिय है अब निगाहें प्रशासन पर हैं कहीं यह रफ्तार फिर किसी और त्रासदी की भूमिका तो नहीं लिख रही?।

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