AKD।गिरीश तिवारी
सोनभद्र। खनिज संपदा से समृद्ध सोनभद्र एक बार फिर प्रदेश में अपनी मजबूत पहचान साबित करते हुए राजस्व संग्रह में पहले स्थान पर पहुंच गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले ने खनन और उपखनन से 678 करोड़ 28 लाख रुपये का राजस्व अर्जित कर पूरे उत्तर प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि जिले की आर्थिक मजबूती और प्रशासन की सख्त निगरानी का परिणाम मानी जा रही है।प्रदेश में खनिज से होने वाली आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इस दौड़ में सोनभद्र का प्रदर्शन सबसे आगे रहा। सख्त निगरानी, पारदर्शी व्यवस्था और अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई के चलते जिले ने यह बड़ा आंकड़ा हासिल किया है।

इससे साफ है कि यहां खनन गतिविधियां संगठित और प्रभावी तरीके से संचालित हो रही हैं।अन्य जिलों की बात करें तो महोबा 394.9 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि हमीरपुर 389.61 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है। इसके अलावा सहारनपुर, जालौन, झांसी, बांदा और प्रयागराज भी इस सूची में शामिल रहे, लेकिन सभी जिले सोनभद्र से काफी पीछे नजर आए। वहीं फतेहपुर और कौशांबी जैसे जिले राजस्व के मामले में निचले पायदान पर रहे, जिससे खनन संसाधनों और उनकी निगरानी के अंतर का साफ असर दिखाई देता है।खनन विभाग के अनुसार राजस्व की रोजाना समीक्षा की जा रही है और अवैध खनन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से राजस्व में लगातार इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह सख्ती और पारदर्शिता बनी रही, तो आने वाले समय में सोनभद्र और भी बड़े रिकॉर्ड बना सकता है।कुल मिलाकर खनन के दम पर सोनभद्र ने न सिर्फ अपनी आर्थिक ताकत साबित की है, बल्कि प्रदेश के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है, जहां संसाधनों के सही उपयोग और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था के सहारे विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।
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