सोनभद्र: (AKD/गिरीश तिवारी)
रॉबर्ट्सगंज नगर के आरटीएस क्लब में चल रहे श्रीरामचरितमानस नवाह पाठ महायज्ञ के चतुर्थ दिवस भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का सजीव वर्णन किया गया। इस अवसर पर श्रीराम दरबार का भव्य श्रृंगार किया गया और सिया राम चले वन को की मार्मिक झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।मुख्य आचार्य सूर्यलाल मिश्र ने मानस पाठ के दौरान कहा कि यदि भगवान श्रीराम का वनवास न होता तो विश्व का कल्याण संभव नहीं होता। उनके वनवास से ही ऋषि-मुनियों और ब्राह्मणों को कष्ट देने वाले राक्षसों का नाश हुआ। उन्होंने बताया कि यह प्रसंग माता कैकेई और मंथरा के माध्यम से घटित हुआ, जिसे सुनकर श्रोता भावुक हो उठे।

भक्तों की आंखें नम हो गईं और कैकेई व मंथरा को प्रभु के वनवास का कारण मानते हुए लोग भावनाओं में बह गए। उन्होंने यह भी कहा कि आज भी समाज में कैकेई और मंथरा नाम कम ही रखे जाते हैं, जबकि प्रभु श्रीराम के हृदय में माता कैकेई और मंथरा के प्रति भी अपार प्रेम था, जिसे तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में स्पष्ट किया है।एक दिन पूर्व रात्रि प्रवचन में सुप्रसिद्ध कथावाचक हेमंत त्रिपाठी एवं अनिल पाण्डेय ने धनुष यज्ञ प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि धनुष टूटते ही विवाह संपन्न हुआ, लेकिन मर्यादा और वंश परंपरा के अनुसार अयोध्या नरेश को बुलाने का संदेश भेजा गया।कथा के द्वितीय सत्र में प्रसिद्ध कथावाचक प्रकाश चंद्र विद्यार्थी ने परशुराम संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि धनुष टूटने की ध्वनि से संपूर्ण भुवन गूंज उठा, जिसे सुनकर परशुराम यज्ञ स्थल पर पहुंचे और सभी राजा भयभीत हो गए। विवाह प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने माता सीता की मांग में सिंदूर भरकर विवाह विधि को पूर्ण किया।मंच संचालन कर रहे आचार्य संतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि सिंदूर प्रेम का प्रतीक है और पति की आयु व संरक्षण से जुड़ा है ।
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