गांधी की शहादत पर गुमनाम सुराजियों को आदिवासियों ने किया नमन, स्वराज और स्वावलंबन का दिखा संगम

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दुद्धी/सोनभद्र(रवि सिंह)
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निर्वाण दिवस के अवसर पर नगवा गांव में आयोजित आदिवासी महोत्सव में संस्कृति, परंपरा, स्वावलंबन और कर्मठता का अनुपम संगम देखने को मिला। लगातार चौबीसवें वर्ष आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ आदिवासी स्वराज्य स्तंभ पर महात्मा गांधी, भगवान बिरसा मुंडा और गुमनाम सुराजियों के चित्रों पर माल्यार्पण व पूजा-अर्चना के साथ किया गया।मुख्य अतिथि सांसद छोटेलाल खरवार, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधायक हरिराम चेरो, ब्लॉक प्रमुख मान सिंह गौड़ और अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से मशाल जुलूस में अग्नि प्रज्ज्वलित किया।

इस अवसर पर नगवा गांव के पांच स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया गया।सभा को संबोधित करते हुए सांसद छोटेलाल खरवार ने कहा कि नगवा की धरती से 1857 की क्रांति में शहीद हुए गुमनाम सुराजियों ने अंग्रेजों को खदेड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने आदिवासियों की जमीन, अधिकारों और स्वशासन से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताते हुए कहा कि इन विषयों को जिला स्तर की बैठकों में प्रमुखता से उठाया जाएगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधायक हरिराम चेरो ने कहा कि गुमनाम आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को पहचान दिलाने का कार्य निरंतर होना चाहिए।

उन्होंने आदिवासी समाज को एकजुट होकर शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान बिरहा के माध्यम से बाल विवाह उन्मूलन, नशा मुक्ति और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संदेश दिया गया। संचालन हरिकिशुन खरवार ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे।

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