कार्रवाई पर उठे सवाल, क्या कुछ बड़े नाम रडार से बाहर?

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AKD/गिरीश तिवारी

सोनभद्र। जिले में आयकर का हाईटेक हल्ला लेकिन क्या जांच बराबरी की है? पिछले तीन दिनों से जिले में आयकर विभाग की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। कार्रवाई इतनी सटीक और हाईटेक है कि खनन कारोबारियों के बीच खलबली मची हुई है। डिजिटल डेटा खंगाला जा रहा है, दस्तावेजों की परतें खोली जा रही हैं और आर्थिक लेन-देन की बारीक जांच की जा रही है। सूत्रों की मानें तो खनन क्षेत्र में आयकर विभाग की यह अब तक की सबसे बड़ी और संगठित कार्रवाई मानी जा रही है। कई ठिकानों पर एक साथ दबिश ने यह साफ संकेत दे दिया है कि इस बार जांच सामान्य नहीं है। लेकिन यहीं से उठने लगे हैं बड़े सवाल? सूत्रों की माने तो खनन बेल्ट में अब एक नई चर्चा गर्म है। कहा जा रहा है कि कार्रवाई का दायरा सबके लिए बराबर नहीं दिख रहा। जिन खनन कर्ताओं की पहचान सत्ता पक्ष के करीबी के तौर पर की जाती है, वे फिलहाल जांच की रडार से बाहर नजर आ रहे हैं। सरकार लगातार पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्रवाई की बात करती है। मंचों से अवैध खनन पर सख्ती के दावे किए जाते हैं। लेकिन जिले में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ खनन कर्ताओं की पकड़ अधिकारियों में इतनी मजबूत है कि जांच टीम उनके आसपास भी नहीं पहुंची। क्या यह महज संयोग है? या फिर सिस्टम की पकड़ कुछ नामों को सुरक्षा कवच दे रही है? हालांकि आयकर विभाग की कार्रवाई अभी जारी है। फाइलें खुल रही हैं, डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और कई कारोबारियों की सांसें अटकी हुई हैं। अब असली सवाल यही है?क्या जांच की आंच उन तक भी पहुंचेगी जिनकी पहचान सत्ता से नजदीकी के रूप में की जाती है?या फिर कार्रवाई का दायरा चुनिंदा नामों तक ही सीमित रहेगा? सोनभद्र की खदानों में सिर्फ खनिज नहीं, सियासत भी दबी है। देखना होगा कि यह जांच सच की गहराई तक जाती है या फिर सतह पर ही थम जाती है।

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