धरोहर से 100 मीटर अंदर नहीं होगा कोई  निर्माण, वजह जान उड़ जाएगा होश

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HIGHLIGHTS
  • वाराणसी के सारनाथ
  • में स्थित
  • भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली  सारनाथ
  • को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने को लेकर दूसरे  यूनेस्को के पुरातत्व विशेषज्ञ हबीब रजा ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के खंडहर परिसर में अशोक लाट, प्राचीन मूलगंध कुटी के बौद्ध मंदिर के अवशेष, धमेख…
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वाराणसी के सारनाथ में स्थित भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली  सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने को लेकर दूसरे  यूनेस्को के पुरातत्व विशेषज्ञ हबीब रजा ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के खंडहर परिसर में अशोक लाट, प्राचीन मूलगंध कुटी के बौद्ध मंदिर के अवशेष, धमेख और धर्मराजिका स्तूप को देखने के साथ कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सारनाथ को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने के साथ आप नियम बना देंगे, लेकिन उसका पालन कैसे कराएंगे। आपके नियम से आम जनता को कोई परेशानी तो नहीं होगी। इससे स्थानीय लोगों की क्या फायदा होगा। आपको बता दें कि निर्माण करने के लिए पुरातत्व विभाग के बायलाज के अनुसार अनुमित देते हैं। पुरातात्विक धरोहर से 100 मीटर के अंदर कोई निर्माण नहीं हो सकता है। 100 से 300 मीटर के बीच शर्तों पर निर्माण की अनुमति दी जाती है। यदि कोई शर्तों का उल्लंघन करता है तो कार्रवाई की जाती है। टीम ने चौखंडी स्तूप पहुंच कर परिसर को देखने के साथ ऊपरी मंजिल पर पहुंचे। वहां से पूरा दृश्य देखने के बाद कहा कि अभी यहां हरियाली बची है।

अच्छी बात है, चौखंडी स्तूप का इतिहास जानने के बाद वह सीधा पुरातत्व खंडहर परिसर पहुंचे। पुरातन मानचित्र के आधार पर धर्मराजिका स्तूप और पास में महाविहार जाने के लिए एक पत्थर को तराश कर बनाई गई सीढ़ी की विशेषता के बारे में जानना चाहा। इसके साथ ही परिसर में बने मनौती स्तूप पर बनी आकृतियों व रख-रखाव के बारे में विस्तार से जानकारी। प्राचीन मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर के अवशेष से जुड़ी भगवान बुद्ध के वर्षा काल में बिताए जीवन और ध्यान को लेकर जानकारी हासिल की। मंदिर के बाहर पत्थर पर बनी फूल की आकृति को देख कर हबीब रजा ने कहा कि ऐसी आकृति अनेक पुरावशेषों पर देखने को मिलती है। अशोक लाट पर लिखो ब्राह्मी लिपि की बारीकियों का अवलोकन कर फोटोग्राफी भी की। इसके बाद सीधे धमेख स्तूप पहुंचे और उसके इतिहास को जानने के साथ उसकी कलाकृतियों को देखा और सराहा।

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