सोनभद्र में 3.54 करोड़ की स्टांप चोरी का खुलासा, प्रशासन की सख्ती से खुला बड़ा रजिस्ट्री घोटाला

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HIGHLIGHTS
  • सोनभद्र( AKD/गिरीश तिवारी)-जिले में रजिस्ट्री के नाम पर चल रहा बड़ा खेल आखिरकार उजागर हो गया।
  • सात
  • महीनों की गहन जांच में प्रशासन ने 3.54 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी पकड़कर पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है।
  • जमीन की असली लोकेशन, सड़कों से दूरी, मकान या पेड़ों की जानकारी छिपाकर कम मूल्यांकन में रजिस्ट्री कराने का यह खेल लंबे समय से जारी था।
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सोनभद्र( AKD/गिरीश तिवारी)-जिले में रजिस्ट्री के नाम पर चल रहा बड़ा खेल आखिरकार उजागर हो गया। सात महीनों की गहन जांच में प्रशासन ने 3.54 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी पकड़कर पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। जमीन की असली लोकेशन, सड़कों से दूरी, मकान या पेड़ों की जानकारी छिपाकर कम मूल्यांकन में रजिस्ट्री कराने का यह खेल लंबे समय से जारी था। डीएम बी.एन. सिंह, एडीएम वागीश शुक्ला, एआईजी स्टांप और सब-रजिस्ट्रार की संयुक्त टीम ने इस पूरे प्रकरण की परतें खोलीं और अब तक 256 फर्जी मामलों का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि औसतन हर महीने 30 से अधिक रजिस्ट्री में गलत जानकारी दी गई थी, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सात माह में 271 मामलों का निस्तारण करते हुए 11 करोड़ रुपये से अधिक की पेनाल्टी लगाई गई है। डीएम बी.एन. सिंह ने स्वयं 30 बैनामों की जांच की, जिनमें 10 मामलों में 23 लाख 14 हजार रुपये की स्टांप कमी पकड़ी गई। वहीं एडीएम वागीश शुक्ला ने 168 बैनामों की जांच में 44 मामलों में 42 लाख 37 हजार रुपये की चोरी पकड़ी। एआईजी स्टांप की जांच में 330 रजिस्ट्री में से 62 में गड़बड़ी मिली और कुल 77 लाख 27 हजार रुपये का नुकसान सामने आया। सब-रजिस्ट्रार स्तर पर हुई जांच में 544 बैनामों में से 140 में अनियमितताएं मिलीं, जिनमें करीब दो करोड़ दो लाख 85 हजार रुपये की स्टांप चोरी उजागर हुई। सात माह की कार्रवाई में डीएम ने अकेले 22 मामलों में 10 करोड़ चार लाख रुपये से अधिक की पेनाल्टी लगाई है।अफसरों के मुताबिक कई लोग स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए जमीन की वास्तविक स्थिति को छिपा लेते हैं। मकान, पेड़, सड़क की स्थिति या मुख्य मार्ग से दूरी जैसी अहम जानकारियां जानबूझकर गलत दी जाती हैं। कई बार व्यावसायिक जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री कराई जाती है ताकि कम स्टांप ड्यूटी लगे। जब जांच में असली स्थिति सामने आती है तो खरीदार को न सिर्फ बकाया स्टांप ड्यूटी बल्कि चार गुना तक जुर्माना भी भरना पड़ता है। एडीएम के अनुसार हर महीने औचक निरीक्षण कर बैनामों की जांच की जाती है। जहां भी तथ्य छिपाने या स्टांप चोरी की बात सामने आती है, वहां तुरंत कार्रवाई होती है। उन्होंने कहा कि अब हर रजिस्ट्री की मैदानी जांच की जा रही है, इसलिए खरीदार ईमानदारी से सम्पूर्ण विवरण दें, अन्यथा जुर्माना भारी पड़ेगा। प्रशासन की इस सख्ती के बाद जिले में स्टांप चोरी करने वालों में अफरा-तफरी और भय का माहौल है।

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