नाबालिक बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को आजीवन कारावास

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HIGHLIGHTS
  • सोनभद्र(AKD/गिरीश तिवारी)-रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक पिता ही अपनी नाबालिग बेटी की इज्जत
  • का दुश्मन बन बैठा, लेकिन इस बार कानून ने भी महज 35 दिनों के भीतर फैसला सुनाकर इतिहास रच दिया है।
  • सोनभद्र की विशेष पॉक्सो अदालत
  • ने अपनी ही बेटी से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती करने वाले दरिंदे पिता को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जिसका अर्थ
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सोनभद्र(AKD/गिरीश तिवारी)-रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक पिता ही अपनी नाबालिग बेटी की इज्जत का दुश्मन बन बैठा, लेकिन इस बार कानून ने भी महज 35 दिनों के भीतर फैसला सुनाकर इतिहास रच दिया है। सोनभद्र की विशेष पॉक्सो अदालत ने अपनी ही बेटी से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती करने वाले दरिंदे पिता को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जिसका अर्थ है कि वह अपने शेष जीवनकाल तक जेल की सलाखों के पीछे रहेगा। साथ ही, अदालत ने दोषी पर डेढ़ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसमें से एक लाख बीस हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे। यह उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा मामला बन गया है, जहां भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज मुकदमे में आरोप तय होने के मात्र 35 दिनों के भीतर न्याय सुनिश्चित किया गया।घटनाक्रम के अनुसार, यह मामला अक्टूबर 2025 में तब सामने आया जब कोन थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता के मामा ने चोपन थाने में तहरीर दी। मार्च 2025 में किशोरी की मां की मौत के बाद वह अपने पिता और दो भाइयों के साथ रह रही थी। इसी दौरान अप्रैल 2025 में आरोपी पिता ने अपनी 15 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। जब किशोरी का शारीरिक बदलाव दिखने लगा और चाची ने कड़ाई से पूछा, तो पीड़िता फूट-फूट कर रो पड़ी और अपनी आपबीती सुनाई। सूचना मिलते ही चोपन पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। मेडिकल परीक्षण और डीएनए जांच के आधार पर पर्याप्त सबूत मिलने के बाद विवेचक ने चार्जशीट दाखिल की। 7 जनवरी को अदालत ने आरोप तय किए और महज 35 दिनों की सुनवाई, 9 गवाहों के बयान और ठोस सबूतों के आधार पर विशेष पॉक्सो अदालत के जज अमित वीर सिंह ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।सरकारी वकील के मुताबिक, पीड़िता सात माह की गर्भवती थी और कोर्ट से गर्भपात की अनुमति न मिलने के कारण उसे सीइब्लूसी (CWC) की निगरानी में रखा गया था, जहां 13 जनवरी को उसने एक बच्ची को जन्म दिया। डीएनए रिपोर्ट ने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि जन्मी बच्ची का पिता आरोपी पिता ही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने बेहद संवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो पीड़िता गहरे मानसिक द्वंद्व में होती है, इसलिए एफआईआर में देरी को आधार बनाकर न्याय को विफल नहीं किया जा सकता। सीओ सिटी रणधीर मिश्रा ने बताया कि पुलिस की प्रभावी पैरवी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के कारण ही इतनी त्वरित सजा संभव हो पाई है, जो समाज के अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है।

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