ड्रोन और सेटेलाइट से नापी जा रहीं सोनभद्र की खदानें, आयकर की हाईटेक जांच से खनन कारोबार में सन्नाटा

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HIGHLIGHTS
  • AKD | गिरीश तिवारी सोनभद्र : आयकर विभाग की जांच अब अपने सबसे व्यापक और तकनीकी रूप में सामने आई है।
  • इस बार कार्रवाई केवल दस्तावेजों की जांच तक सीमित
  • नहीं है, बल्कि खदानों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए ड्रोन कैमरों और सेटेलाइट तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
  • पूरे जिले में खनन क्षेत्र को डिजिटल तरीके से मापा जा रहा है, जिससे स्वीकृत
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AKD | गिरीश तिवारी

सोनभद्र : आयकर विभाग की जांच अब अपने सबसे व्यापक और तकनीकी रूप में सामने आई है। इस बार कार्रवाई केवल दस्तावेजों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि खदानों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए ड्रोन कैमरों और सेटेलाइट तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। पूरे जिले में खनन क्षेत्र को डिजिटल तरीके से मापा जा रहा है, जिससे स्वीकृत सीमा और वास्तविक खनन की तुलना की जा सके।आयकर विभाग की टीम ने जिला खनिज विभाग से प्राप्त पट्टों के दस्तावेजों के आधार पर खदानों की जियो-मैपिंग शुरू की है। सूत्रों के अनुसार शिकायत मिली थी कि कई खदानों में तय मानकों से अधिक गहराई तक खनन किया गया है।

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इसी आधार पर प्रदेश भर में एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें सोनभद्र को सबसे प्रमुख फोकस बनाया गया है।करीब 25 वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे अधिकारियों ने पहले चरण में आधा दर्जन से अधिक खनन कारोबारियों के आवास और प्रतिष्ठानों पर दबिश दी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए कई गाड़ियों पर शादी समारोह के स्टिकर और पंपलेट लगाए गए थे। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ उत्तराखंड नंबर की गाड़ियां भी कार्रवाई में शामिल रहीं। ओबरा थाना क्षेत्र सहित कई स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जिससे पूरे खनन कारोबार में सन्नाटा पसरा हुआ है।वाराणसी जोन के ज्वाइंट डायरेक्टर प्रांजल सिंह के नेतृत्व में चल रही इस कार्रवाई के तहत प्रदेश में 20 से 22 स्थानों पर छापेमारी की जा रही है, जबकि अकेले सोनभद्र में लगभग 14 ठिकानों को जांच के दायरे में लिया गया है। लगभग 100 से अधिक अधिकारी अलग-अलग टीमों में बंटकर जांच कर रहे हैं।

पत्थर की खदानों का स्थलीय निरीक्षण किया गया है और ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र की सेटेलाइट व जीपीएस मैपिंग की जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक गहराई और स्वीकृत सीमा का मिलान किया जा रहा है।जांच के दौरान छात्र शक्ति डाला लंगड़ा मोड़ स्थित तीन नंबर की बंद पड़ी खदान, जिसका संबंध बसपा विधायक उमाशंकर सिंह से बताया जा रहा है, वहां भी टीम ने दस्तावेजों की पड़ताल की। अधिकारियों ने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि शिकायतों के आधार पर मानक विहीन खनन की जांच की जा रही है। यदि किसी खननकर्ता की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।शादी के स्टिकर लगी गाड़ियों से शुरू हुआ यह गोपनीय ऑपरेशन अब प्रदेश की सबसे बड़ी तकनीकी जांच के रूप में सामने आ चुका है। सोनभद्र के खनन क्षेत्र में मचे हड़कंप के बीच पूरे व्यवसाय जगत की नजर अब इस कार्रवाई के अंतिम नतीजों पर टिकी हुई है।

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