हजारों क्यूसेक पानी बहाया, जल संरक्षण पर सवाल……

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HIGHLIGHTS
  • AD/गिरीश तिवारी सोनभद्र।
  • जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां विकास के नाम पर कथित
  • अनियमितता और जल संरक्षण की धज्जियां उड़ाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
  • रॉबर्ट्सगंज विकासखंड के लोढ़ी ग्राम पंचायत
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AD/गिरीश तिवारी

सोनभद्र। जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां विकास के नाम पर कथित अनियमितता और जल संरक्षण की धज्जियां उड़ाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रॉबर्ट्सगंज विकासखंड के लोढ़ी ग्राम पंचायत में तालाब खुदाई को लेकर ऐसा बवाल मचा है कि अब पूरा मामला प्रशासन की कार्यशैली और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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पढ़े यह खास रिपोर्ट……..
दरअसल, मामला लोढ़ी ग्राम पंचायत का है, जहां एक पुराने और पहले से जलयुक्त तालाब की खुदाई का काम अचानक शुरू करा दिया गया। आरोप है कि इस कार्य के लिए न तो ग्राम सभा में कोई प्रस्ताव पारित किया गया और न ही किसी प्रकार की बैठक आयोजित की गई। बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के सीधे मशीनों को उतार दिया गया और तालाब की खुदाई शुरू कर दी गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि तालाब में भरा हजारों क्यूसेक पानी, जो गांव के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभा रहा था, उसे जेसीबी और पंपिंग मशीनों के जरिए खेतों की ओर बहा दिया गया। जहां एक ओर सरकार ‘जल ही जीवन है’ का संदेश देते हुए जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह खुलेआम पानी की बर्बादी ने लोगों को हैरान और आक्रोशित कर दिया है। मामले में मनोनीत प्रधान लक्ष्मी नारायण ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तालाब की खुदाई की जा रही है, वह पहले से ही पर्याप्त गहरा था और उसमें सालभर पानी का ठहराव बना रहता था। यही पानी गांव के पशु-पक्षियों के साथ-साथ आसपास के वन क्षेत्र के जीव-जंतुओं के लिए भी एकमात्र सहारा था। लेकिन खुदाई के नाम पर पहले पानी को पूरी तरह खाली कर दिया गया, जिससे अब जल संकट और गहराने की आशंका पैदा हो गई है।

इस गांव में लगातार पानी की रहती है समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले से ही भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे में तालाब का पानी बहा देना आने वाले समय में बड़े संकट का संकेत है। इतना ही नहीं, जिस तरह पानी को खेतों में छोड़ा गया है, उससे किसानों की खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है। इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की बू भी साफ तौर पर महसूस की जा रही है। आरोप है कि बिना प्रस्ताव और बिना अनुमति के काम शुरू करना, फर्जी तरीके से साइन और मुहर का इस्तेमाल करना ये सभी बातें बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही हैं। मनोनीत प्रधान ने यह भी दावा किया कि इससे पहले भी ग्राम सभा के खाते से करीब 18 लाख रुपये बिना डोंगल के ही निकाल लिए गए थे, जिसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई थी, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

नियमों को ताख पर रखकर कार्य
सूत्रों कि माने तो तालाब खुदाई का यह कार्य सिंचाई विभाग से प्राप्त धनराशि के माध्यम से कराया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से पूरे काम को अंजाम दिया जा रहा है, उसने न सिर्फ नियमों को दरकिनार किया है बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका को भी बल दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि तालाब में भरे पानी को सुरक्षित रखते हुए चरणबद्ध तरीके से खुदाई की जाती, तो जल संरक्षण भी बना रहता और जीव-जंतुओं को भी राहत मिलती। लेकिन यहां तो विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों को ही नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

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गांव में बढ़ रहा आक्रोश
फिलहाल, गांव में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और लोग इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को किस तरह लेता है और क्या दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा। बड़ा सवाल यही है क्या विकास के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर जल संसाधनों की बर्बादी की जाएगी? और अगर ऐसा है, तो आखिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

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