पटवध पेयजल योजना पर विधायक का सख्त तेवर, लापरवाही पर चेतावनी-“काम नहीं हुआ तो कंपनी को बना देंगे कंपना, बोकला भी छोड़ा देंगे”

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HIGHLIGHTS
  • AKD।गिरीश तिवारी डाला।सोनभद्र- पटवध पेयजल समूह योजना, जिसे जल जीवन मिशन की देश की शुरुआती और बड़ी परियोजनाओं में गिना गया था, अब अपनी धीमी रफ्तार को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 नवंबर 2020 को किए गए वर्चुअल शिलान्यास और मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
  • व केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
  • की मौजूदगी के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात
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AKD।गिरीश तिवारी

डाला।सोनभद्र– पटवध पेयजल समूह योजना, जिसे जल जीवन मिशन की देश की शुरुआती और बड़ी परियोजनाओं में गिना गया था, अब अपनी धीमी रफ्तार को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 नवंबर 2020 को किए गए वर्चुअल शिलान्यास और मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात उम्मीदों के अनुरूप नहीं दिख रहे हैं। यही वजह रही कि रॉबर्ट्सगंज के विधायक भूपेश चौबे को खुद मौके पर उतरकर निरीक्षण करना पड़ा।निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने योजना की प्रगति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। 650 गांवों तक हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन अब तक महज 29 गांवों में ही पानी की आपूर्ति हो सकी है।

इस धीमी प्रगति पर विधायक का गुस्सा मौके पर साफ तौर पर दिखा।विधायक भूपेश चौबे ने अधिकारियों को कड़ी धूप में अपने साथ खड़ा कर जवाब-तलब किया। यह केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं रहा, बल्कि एक सख्त संदेश था कि जनता की प्यास को नजरअंदाज करने वालों को अब उसी हालात का अहसास कराया जाएगा।

एसी कमरों में बैठकर योजनाओं की समीक्षा करने के बजाय जमीनी सच्चाई से रूबरू होने की हिदायत दी गई।उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि योजना में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों का “बोकला छोड़ दिया जाएगा” और यदि दिसंबर 2026 तक सभी 650 गांवों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई, तो कार्यदाई कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे “कंपना” बना दिया जाएगा।इस योजना में सेंचुरी एरिया से एनओसी मिलने में देरी और कार्य की सुस्त रफ्तार बड़ी बाधा बनकर सामने आई है, जिससे पूरी परियोजना की साख पर असर पड़ रहा है।

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हालांकि संबंधित अधिकारी अब भी दिसंबर 2026 तक लक्ष्य पूरा करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन विधायक की सख्त चेतावनी के बाद अब सबकी निगाह इस बात पर टिक गई है कि क्या काम में तेजी आएगी या लापरवाही पर कार्रवाई तय होगी।

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