बालू खनन के आगे बेबस ग्रामीण! ट्रकों ने सड़क को बनाया मौत का रास्ता, धूल-धक्कड़ से त्रस्त सेंचुरी एरिया

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HIGHLIGHTS
  • दुद्धी।सोनभद्र(रवि सिंह,गिरीश तिवारी)-दुद्धी तहसील क्षेत्र में सेंचुरी एरिया से होकर गुजरने वाला खोखा-पकड़ेवा मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
  • रीवा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-39) से कनहर नदी तक जाने वाले इस मार्ग पर प्रतिदिन सैकड़ों बालू लदे भारी वाहनों की आवाजाही ने सड़क को पूरी तरह जर्जर कर दिया है।
  • हाथीनाला के जंगलों से होकर गुजरने वाले इस रास्ते से खोखा, पकड़ेवा, बहेराडोल, डालपीपर समेत
  • कई आदिवासी बहुल गांव जुड़े हुए हैं, लेकिन अब यह सड़क ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं बल्कि मुसीबत
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दुद्धी।सोनभद्र(रवि सिंह,गिरीश तिवारी)-दुद्धी तहसील क्षेत्र में सेंचुरी एरिया से होकर गुजरने वाला खोखा-पकड़ेवा मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। रीवा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-39) से कनहर नदी तक जाने वाले इस मार्ग पर प्रतिदिन सैकड़ों बालू लदे भारी वाहनों की आवाजाही ने सड़क को पूरी तरह जर्जर कर दिया है।

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हाथीनाला के जंगलों से होकर गुजरने वाले इस रास्ते से खोखा, पकड़ेवा, बहेराडोल, डालपीपर समेत कई आदिवासी बहुल गांव जुड़े हुए हैं, लेकिन अब यह सड़क ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं बल्कि मुसीबत का कारण बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कनहर नदी में बालू खनन शुरू होने के बाद सड़क जगह-जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है, जबकि दिनभर उड़ने वाली धूल लोगों का जीना दुश्वार कर रही है।

सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। हाल ही में बहेराडोल में हाईस्कूल की स्थापना से बच्चों को शिक्षा की सुविधा तो मिली, लेकिन स्कूल तक पहुंचने वाला मार्ग अब खतरे से खाली नहीं है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि खनन से जुड़े लोगों ने जंगल के भीतर कई वैकल्पिक रास्ते बना लिए हैं, जिससे वन क्षेत्र को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं मार्ग पर बनी कई छोटी-बड़ी पुलियाएं भी जर्जर होकर टूटने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, बावजूद इसके ओवरलोड बालू लदे ट्रक लगातार इनसे गुजर रहे हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के कई गांव आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और अब सड़क की यह दुर्दशा उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से सड़क की तत्काल मरम्मत, जर्जर पुलियों के पुनर्निर्माण तथा ओवरलोड बालू वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासन की होगी।

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