
सोनभद्र में जनसुनवाई के दौरान उस वक्त माहौल भावुक हो गया, जब अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे दो दिव्यांगजनों को तत्काल मोटराइज्ड ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई गई। ट्राई साइकिल मिलते ही दोनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। एक दिव्यांग ने बताया कि अब रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम होगी, तो वहीं दूसरे दिव्यांग छात्र के लिए कॉलेज तक पहुंचकर पढ़ाई जारी रखने का रास्ता आसान हो गया है। खास बात ये है कि दोनों मोटराइज्ड ट्राई साइकिल एनटीपीसी के सीएसआर फंड से उपलब्ध कराई गई हैं। जिले में जिलाधिकारी की जनसुनवाई के दौरान सामने आया एक मामला अब दो दिव्यांगजनों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।
अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में पहुंचे अनपरा निवासी असगर हुसैन ने बताया कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। आवागमन में काफी परेशानी होती है और रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने जिलाधिकारी के सामने मोटराइज्ड ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि वह अपने दैनिक कार्यों को आसानी से कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। वहीं ग्राम भैंसवार, तहसील घोरावल निवासी अजय प्रताप सिंह ने भी अपनी परेशानी बताई। अजय प्रताप ने कृष्णा पीजी कॉलेज, राजगढ़, मिर्जापुर में दाखिला लिया है। उनका कॉलेज घर से करीब 15 किलोमीटर दूर है। आवागमन का साधन नहीं होने के कारण उन्हें नियमित रूप से कॉलेज जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
अजय प्रताप ने मोटराइज्ड ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि वह बिना किसी बाधा के कॉलेज जा सकें और अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। जिलाधिकारी ने दोनों दिव्यांगजनों की समस्या को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना और तत्काल आवश्यक कार्रवाई कराई। इसके बाद दोनों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई गई, जो एनटीपीसी के सीएसआर फंड के माध्यम से प्रदान की गई है। जैसे ही दोनों दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल मिली, उनके चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। लंबे समय से आवागमन की समस्या से जूझ रहे दोनों के लिए ये पल बेहद भावुक था। खुशी के आंसुओं के साथ उन्होंने जिला प्रशासन और शासन के प्रति आभार जताया। उनका कहना था कि अब आवागमन आसान होगा, दैनिक कार्यों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और अजय प्रताप सिंह नियमित रूप से कॉलेज जाकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
जनसुनवाई का ये भावुक पल सिर्फ एक समस्या के समाधान की कहानी नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को सम्मान, आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की ओर बढ़ाने वाली पहल की तस्वीर भी पेश करता है। जिलाधिकारी की संवेदनशील पहल और एनटीपीसी के सीएसआर सहयोग से दो दिव्यांगजनों के लिए मुश्किल सफर अब काफी आसान हो गया है।
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