धान से भरी बोरियां सिर पर रख कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान, व्यवस्था पर फूटा गुस्सा

Share

“खरीद नहीं सुधरी तो कलेक्ट्रेट में उतार देंगे धान” किसानों की दो टूक चेतावनी

सोनभद्र। जनपद में धान खरीद व्यवस्था को लेकर किसानों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर उस वक्त किसानों के आक्रोश का केंद्र बन गया, जब किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा के नेतृत्व में दर्जनों किसान सिर पर धान से भरी बोरियां लेकर प्रदर्शन करने पहुंच गए। यह प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए एक सीधी चेतावनी थी अगर धान खरीद व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो किसान अपना धान उठाकर कलेक्ट्रेट परिसर में ही उतार देंगे। कलेक्ट्रेट परिसर में किसानों की यह तस्वीर बेहद प्रतीकात्मक और सवाल खड़े करने वाली थी। धान की बोरियां सिर पर रखे किसान मानो यह कह रहे हों कि खेत से लेकर सरकारी दफ्तर तक, किसान आज भी न्याय के लिए भटकने को मजबूर है। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी धान खरीद सिर्फ कागजों में सुचारू है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।

हाइब्रिड धान खरीद मानक पर सवाल

सोनभद्र। जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने सबसे पहले हाइब्रिड धान की खरीद के मौजूदा मानक को किसान विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रति विश्वा एक कुंटल 20 किलो धान की खरीद की जा रही है, जो किसानों के उत्पादन के मुकाबले बेहद कम है। मांग की गई कि इसे बढ़ाकर डेढ़ कुंटल प्रति विश्वा किया जाए, ताकि किसान को उसकी मेहनत और लागत के अनुरूप लाभ मिल सके। संदीप मिश्रा ने कहा कि आज का किसान खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ती लागत से पहले ही परेशान है। ऐसे में जब वह सरकारी क्रय केंद्र पर पहुंचता है, तो उसे सीमित खरीद और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति किसानों को हतोत्साहित करने वाली है।

जांच रिपोर्टों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

सोनभद्र। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि धान खरीद में गड़बड़ियों को लेकर कई मामलों में जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। संदीप मिश्रा ने कहा कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद बेमानी है। उन्होंने साफ कहा कि प्रशासन सिर्फ जांच बैठाकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहता है, जबकि किसान को तत्काल राहत और न्याय चाहिए। किसानों ने मांग की कि जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

ठंड में बारी का इंतजार कर रहे किसान

सोनभद्र। किसानों का आरोप है कि कई धान क्रय केंद्रों पर केंद्र प्रभारियों की लापरवाही के कारण किसान कई-कई दिनों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड में किसान खुले आसमान के नीचे बैठकर सिर्फ इस भरोसे में समय काट रहे हैं कि शायद आज उनका धान तौल लिया जाए। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि कई बार धान लेकर केंद्र पहुंचने के बाद यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “आज का कोटा खत्म हो गया” या “रजिस्टर में नाम नहीं चढ़ा है।” इससे किसान को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ती है।

किसान रजिस्टर नियमित करने की मांग

सोनभद्र। ज्ञापन में एक अहम मांग यह भी रखी गई कि किसान रजिस्टर को सोमवार से शनिवार तक नियमित रूप से अपडेट किया जाए। इससे किसानों को पहले ही यह जानकारी मिल सकेगी कि उनकी बारी कब आने वाली है और वे उसी हिसाब से धान लेकर केंद्र पहुंच सकें। किसानों का कहना है कि रजिस्टर की अनियमितता ही अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी जड़ है। राइस मिलरों और खरीद प्रभारियों की जांच की मांग किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने धान खरीद में शामिल राइस मिलरों और केंद्र प्रभारियों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई। किसानों का आरोप है कि मिलीभगत के चलते वास्तविक किसानों की बजाय चुनिंदा लोगों का धान पहले खरीदा जा रहा है, जबकि आम किसान दर-दर भटकने को मजबूर है।

महिलाओं और नौजवानों की मजबूत भागीदारी

सोनभद्र। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में किसान महिलाएं और नौजवान भी शामिल रहे। महिलाओं ने कहा कि खेत में मेहनत हम भी करते हैं, लेकिन जब धान बेचने की बारी आती है, तो हमें भी अपमान और परेशानी झेलनी पड़ती है। नौजवानों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने अब भी आंखें मूंदे रखीं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक होगा।

प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश

सोनभद्र। कलेक्ट्रेट परिसर में हुए इस प्रदर्शन ने प्रशासन के सामने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किसान को उसकी उपज का हक कब मिलेगा? किसानों का संदेश बिल्कुल साफ है, अगर धान खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार नहीं हुआ, तो किसान सड़कों से लेकर कलेक्ट्रेट तक आंदोलन तेज करेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाता है या फिर किसानों का यह आक्रोश आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है।

Author Profile

Public Bharat News
Public Bharat News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *