भक्त प्रह्लाद की लीला से मंत्र मुग्ध हुए भक्त

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दुद्धी(रवि सिंह)-श्री रामलीला मंच पर आयोजित श्री रासलीला मंचन के आठवें दिन सोमवार को भक्त प्रह्लाद के चरित्र और उनके संघर्षों का मंचन वृन्दावन के कलाकारों किया गया।मंचन के दौरान हिरणाकश्यप के भाई हिरण्याक्षय जब पृथ्वी की चटाई बनाकर पाताल ले कर चले जा कर प्रकोटा का घेरा बना देते है ताकि भगवान विष्णु का प्रवेश न हो सके। यह जानकार भगवान विष्णु ने वराह अवतार लिया और हिरण्याक्षय का वध कर पृथ्वी को पाताल लोक से के कर आए।जब यह जानकारी भक्त प्रह्लाद के पिता को मंत्रियों द्वारा मिली कि आपके भाई का वध हो गया।फिर वे ब्रह्मा जी की तपस्या कर अमर होने का वरदान मांगा।

उस दौरान उनकी पत्नी का हरण करने भगवान इंद्र आए तब देव ऋषि नारद आ गए फिर उन्होंने ने इंद्र को समझकर हिरणाकश्यप की पत्नी कयादु को कुटिया में साथ ले आए। जहां उन्हें भक्तिमार्ग का प्रसंग सुनाया कुछ समय बाद भक्त प्रह्लाद का जन्म हुआ। कुछ समय बाद जन्म की खुशियां मनाने की तैयारी बधाइयां बजवाकर महोत्सव जैसा मनाने की तैयारी का भक्त प्रह्लाद ने विरोध कर हरि भक्तों को बुलाने को कही और साधु संतों की कीर्तन हो।
इस दरमियान दोनों में विवाद हो गया और वे नगर भ्रमण करने अपने मित्र प्रमोद के साथ निकल गए तो वहां कुम्हारी विलाफ करती हुई दिखाई,भक्त ने होने का कारण तो तो बताया कि मेरे दो बिल्ली के बच्चे आभा में प्रवेश कर गए।कुम्हारी ने कहा जगदीश की कृपा रही तो बच्चे जिंदा रहेंगे।इस दरमियान दोनों में विवाद हो गया।कुछ समय बाद
पढ़ने के लिए दैत्यों के गुरु संडामर्कट के पास भेजते है और दैत्यों की पढ़ाई करने को कहते है पर भक्त प्रह्लाद केवल हरि कीर्तन ही गाते है।यह देख उन्हें संडामर्कट ने गुरुकुल से निकालने की बात दरबार में जाकर हिरणाकश्यप से की तो उन्होंने अपने मंत्री को भक्त प्रह्लाद के सर काटने का आदेश दिया यह सुन मंत्री दरबार से भाग गया।सहित अन्य यतन पिता के द्वारा किया गया जिसमें पहाड़ी से गिरवाए तो भोलेनाथ गोद में ले लिए जब कई उपाय काम नहीं आए तो तो स्वयं उन्हें मारने के लिए तैयार हुए जहां एक प्रसंग में खंभे फाड़ते हुए नृसिंह का अवतार हुआ और पिता हिरणाकश्यम को अधिक मास में उसका वध किया।भक्त प्रह्लाद राजा हुए।
इस दौरान लीला के प्रमुख स्वामी दाऊ दयाल उपाध्याय,व्यास ठाकुर लाल,अंतरराष्ट्री संत रूपनारायण शास्त्री सहित आयोजक समिति के लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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