AKD /गिरीश तिवारी
25 हजार के इनामी हुए कथित डॉक्टर नसीम स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
सोनभद्र। कोन क्षेत्र में प्रसूता महिला की मौत के बाद सामने आए चर्चित ग्लोबल हॉस्पिटल प्रकरण में पुलिस ने फरार आरोपियों के खिलाफ शिकंजा और कस दिया है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देश पर मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे डॉ. नसीम अहमद पर 25 हजार रुपये तथा सहआरोपी सलमा पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। इनाम घोषित होने के बाद पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास और तेज कर दिए हैं। इसकी जानकारी कोन थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने दी है।
गौरतलब है कि कोन क्षेत्र में प्रसव पीड़ा होने पर एक महिला को उपचार के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत रेफर किया गया था। आरोप है कि निर्धारित सरकारी अस्पताल के बजाय उसे बिना पंजीकरण संचालित ग्लोबल हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान उसकी मौत हो गई। महिला की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया और परिजनों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
बताया जाता है कि घटना की सूचना मिलते ही कोन थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा तत्काल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उस समय हालात बेहद संवेदनशील थे और अस्पताल में हंगामे की स्थिति बन रही थी। थाना प्रभारी ने सूझबूझ का परिचय देते हुए आक्रोशित लोगों को समझाया-बुझाया और उन्हें भरोसा दिलाया कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के इस प्रयास से स्थिति नियंत्रित रही और संभावित बड़ा विवाद टल गया। स्थानीय लोगों के बीच भी थाना प्रभारी की इस भूमिका की चर्चा रही कि उन्होंने तनावपूर्ण माहौल को संभालते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने तत्काल संज्ञान लिया और जांच के निर्देश जारी किए। डीएम के निर्देश पर उपजिलाधिकारी ओबरा विवेक कुमार सिंह, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. गुलाब शंकर यादव, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. कीर्ति आजाद बिंद तथा क्षेत्राधिकारी कोन की संयुक्त टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच की। जांच में अस्पताल बिना वैध पंजीकरण संचालित पाया गया, जिसके बाद उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। कोन थाने में मुकदमा अपराध संख्या 104/2026 के तहत धारा 105, 318(4) बीएनएस तथा धारा 34 राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद से आरोपी फरार चल रहे हैं। पुलिस के अनुसार डॉ. नसीम अहमद पुत्र सरफुद्दीन निवासी खरौदी, थाना कोन पर 25 हजार रुपये तथा सलमा पत्नी आसिफ मोहम्मद निवासी देवाटन, थाना कोन पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। गिरफ्तारी अथवा गिरफ्तारी में सहायक सूचना देने वालों को पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर जिले में संचालित मानक विहीन अस्पतालों की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों और प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार जिस अस्पताल में मरीजों का उपचार किया जा रहा था, वहां की आंतरिक व्यवस्था भी सवालों के घेरे में थी। अस्पताल के भीतर की स्थिति देखकर लोग हैरान रह गए। बताया गया कि ऑपरेशन थिएटर तक में कई व्यवस्थाएं जुगाड़ के सहारे संचालित थीं। कमरों में धूल जमे सामान, अव्यवस्थित उपकरण और उपचार व्यवस्था की तस्वीरें कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि संबंधित अस्पताल पूर्व में भी कार्रवाई झेल चुका था। वर्ष 2025 में भी एक विवादित घटना के बाद अस्पताल को सील किया गया था। बाद में दोबारा संचालन शुरू हो गया और शिकायतों के बाद फिर कार्रवाई हुई। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन पूरी तरह नहीं रुक सका। अब एक और मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कार्रवाई हमेशा किसी मौत, हंगामे या मीडिया की सुर्खियों के बाद ही क्यों दिखाई देती है? जब यह अस्पताल बिना पंजीकरण संचालित हो रहा था तब स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां थी? जिन अधिकारियों और नोडल अधिकारियों को निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, क्या उन्हें ऐसे अस्पतालों की जानकारी नहीं होती? या फिर किसी बड़ी घटना के बाद ही कार्रवाई की परंपरा बन चुकी है?
सूत्रों की मानें तो जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई ऐसे अस्पताल संचालित हो रहे हैं जहां कागजों पर मानकों की पूर्ति दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और होती है। कई अस्पतालों में 24 घंटे एमबीबीएस चिकित्सक की उपलब्धता का दावा किया जाता है, जबकि वास्तविकता में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति तक सुनिश्चित नहीं हो पाती। कहीं डॉक्टर केवल दस्तावेजों में मौजूद हैं तो कहीं उपकरण और सुविधाएं मानकों से काफी नीचे बताई जाती हैं। निस्संदेह जिलाधिकारी चर्चित गौड़ द्वारा घटना के बाद दिखाई गई तत्परता, अस्पताल को सील करने की कार्रवाई और पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देश पर फरार आरोपियों पर इनाम घोषित किया जाना प्रशासनिक गंभीरता को दर्शाता है। वहीं कोन थाना पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज करना और फरार आरोपियों की तलाश तेज करना भी पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फिलहाल पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मौत के इस चर्चित मामले में कानून से बचने की कोशिश कर रहे आरोपी कब तक पुलिस की पकड़ से दूर रह पाते हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या यह कार्रवाई केवल एक अस्पताल तक सीमित रहती है या फिर जिले में वर्षों से संचालित मानक विहीन अस्पतालों पर भी व्यापक अभियान चलाया जाता है। आखिरकार सवाल केवल एक अस्पताल का नहीं, बल्कि उन तमाम जिंदगियों का है जो स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे ऐसे संस्थानों के भरोसे छोड़ दी जाती हैं।
Author Profile

Latest entries
उत्तर प्रदेशMay 31, 2026प्रसूता मौत कांड में फरार आरोपियों पर इनाम
Breaking_NewsMay 31, 2026नाबालिग से दुष्कर्म मामले का वांछित आरोपी गिरफ्तार
Breaking_NewsMay 31, 2026रहस्यमयी हालात में सीमेंट कर्मचारी की मौत, कई दिन बाद कमरे से मिला शव
सम्पादकीयMay 30, 2026जंगल में मिला महिला का नरकंकाल, 20 दिन से लापता पार्वती की हुई शिनाख्त
