ओबरा चोपन मार्ग बना खनन संचालकों का निजी पार्किंग यार्ड, ब्लास्टिंग के दौरान घंटों जाम, सडक पर तैनात डंडाधारी गार्ड

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ओबरा/सोनभद्र(AKD/गिरीश तिवारी)-
ओबरा चोपन मुख्य मार्ग निजी खनन संचालकों की मनमानी और दबंगई का खुला मैदान बन चुका है। ओबरा बिल्ली खनन क्षेत्र में निजी खदान संचालकों द्वारा दोपहर के समय की जा रही ब्लास्टिंग के दौरान और उसके तुरंत बाद खदानों में चलने वाले टीपर और डंपर जानबूझकर सड़क के दोनों तरफ कतारबद्ध खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे यह व्यस्त मार्ग पूरी तरह संकरा होकर जाम में तब्दील हो जाता है।

दोपहर के समय जब स्कूल से बच्चों की वापसी, दफ्तरों का आवागमन और सवारी गाड़ियों की आवाजाही चरम पर होती है, उसी वक्त सड़क के दोनों ओर भारी खनन वाहनों की लंबी लाइन लग जाती है। नतीजा यह कि बसें, ऑटो, बाइक सवार, पैदल राहगीर सब बीच सड़क पर फंस जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्लास्टिंग के बाद घंटों तक सड़क पर जाम लगा रहता है, लेकिन खनन संचालकों की ओर से यातायात व्यवस्था के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जाता।स्थिति को संभालने के नाम पर प्रशासन कहीं नजर नहीं आता, जबकि खनन संचालकों द्वारा अपने निजी सिक्योरिटी गार्ड डंडा लेकर सड़क पर तैनात कर दिए जाते हैं। आम जनता का आरोप है कि सार्वजनिक सड़क पर डंडाधारी गार्डों की मौजूदगी सीधे तौर पर खनन संचालकों की दबंग मानसिकता को उजागर करती है।

स्थानीय नागरिकों का साफ आरोप है कि खनन संचालक सरकारी नियमों, यातायात कानूनों और जनसुविधाओं को खुलेआम ताक पर रखकर सार्वजनिक सड़क को अपने खनन वाहनों की स्थायी पार्किंग में बदल चुके हैं। न ब्लास्टिंग का कोई नियत समय तय किया गया है, न टीपर हटाने की जिम्मेदारी ली जाती है और न ही वैकल्पिक मार्ग या ट्रैफिक डायवर्जन की कोई व्यवस्था की जाती है।लोगों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी ने खनन संचालकों के हौसले इतने बुलंद कर दिया है कि अब वे दोपहर के व्यस्त समय में भी सड़क जाम करने से नहीं हिचकते। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ओबरा चोपन मार्ग पर निजी खनन संचालकों की इस खुली मनमानी पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को रोज़ रोज़ के जाम और भय के माहौल से मुक्ति मिल सके।

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