(AKD/गिरीश तिवारी)
सोनभद्र। जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान रविवार को ब्राह्मण समाज की अभूतपूर्व एकजुटता का साक्षी बना, जब यहां विप्र समागम सहभोज कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के कोने-कोने से आए हजारों की संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग शामिल हुए। मैदान में सुबह से ही लोगों का आना शुरू हो गया था और देखते ही देखते पूरा परिसर जनसमूह से भर गया। इस समागम का मुख्य उद्देश्य केवल एक सामाजिक आयोजन तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज की वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर गंभीर मंथन करना और आने वाले समय के लिए एक स्पष्ट रणनीति तैयार करना था। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने खुलकर अपनी बातें रखीं और समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

समाज की स्थिति पर खुली बातचीत
सोनभद्र। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में ब्राह्मण समाज को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने के प्रयास किए गए हैं। चाहे वह राजनीति का क्षेत्र हो, प्रशासनिक व्यवस्था हो या सामाजिक सम्मान का सवाल हर स्तर पर समाज को नजरअंदाज करने की कोशिश हुई है। वक्ताओं का कहना था कि इसका सीधा असर समाज के मनोबल पर पड़ा है और लोगों के बीच असंतोष बढ़ा है। इसी असंतोष और पीड़ा को साझा करने तथा समाधान खोजने के लिए यह समागम आयोजित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जब तक समाज एकजुट नहीं होगा, तब तक उसकी आवाज़ प्रभावी ढंग से नहीं सुनी जाएगी। यही कारण है कि इस तरह के कार्यक्रम समय की मांग बन चुके हैं।

एक मंच पर जुटा समाज
सोनभद्र। रामलीला मैदान में हर उम्र के लोग नजर आए बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और छात्र। सभी के चेहरों पर एक बात साफ झलक रही थी समाज के लिए कुछ करने की चिंता और संकल्प। वक्ताओं ने कहा कि यह समागम इस बात का प्रमाण है कि ब्राह्मण समाज अब चुप बैठने वाला नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मान को लेकर सजग हो चुका है। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि समाज को तोड़ने की कोशिशें पहले भी हुई हैं, लेकिन ब्राह्मण समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता और विचारशीलता रही है। जरूरत है कि इसी ताकत को पहचाना जाए और संगठित रूप में आगे बढ़ा जाए।

राजनीतिक संदेश भी रहा स्पष्ट
सोनभद्र। समागम के दौरान राजनीतिक संदेश भी साफ तौर पर सामने आया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ब्राह्मण समाज किसी एक दल का बंधुआ नहीं है, लेकिन जो भी राजनीतिक दल या सत्ता समाज के हितों की रक्षा करेगी, सम्मान देगी और उसकी भागीदारी सुनिश्चित करेगी, समाज उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। वहीं, जो ताकतें समाज को कमजोर करने, हाशिये पर धकेलने या अपमानित करने का प्रयास करेंगी, उनका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि विरोध का रास्ता संविधान और लोकतंत्र के दायरे में रहकर ही अपनाया जाएगा, लेकिन अब चुप्पी नहीं रहेगी।
युवाओं की भूमिका पर जोर
सोनभद्र। कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि समाज का भविष्य युवाओं के हाथ में है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारी इन सभी क्षेत्रों में युवाओं को आगे आना होगा। साथ ही उन्हें राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी, ताकि समाज की आवाज़ सही मंच तक पहुंचे। वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर समाज को जोड़ने का काम करें। उन्होंने कहा कि जब युवा जागरूक होंगे, तभी समाज मजबूत होगा।

सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर मंथन
सोनभद्र। समागम में समाज की आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बदलते दौर में कई परिवार आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में समाज को आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करना होगा। जरूरतमंद परिवारों की मदद, बच्चों की शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर ध्यान देना जरूरी है। इसके साथ ही सामाजिक मूल्यों और संस्कारों की रक्षा पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखना भी समाज की जिम्मेदारी है।
सहभोज बना एकता का प्रतीक
सोनभद्र। कार्यक्रम के अंत में सहभोज का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया। सहभोज के दौरान आपसी बातचीत, परिचय और मेलजोल का माहौल रहा। आयोजकों ने कहा कि सहभोज केवल भोजन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समाज की बराबरी, भाईचारे और एकता का प्रतीक है। लोगों ने इसे एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज के बीच आपसी दूरी कम होती है और एक-दूसरे को समझने का अवसर मिलता है।

भविष्य में और बड़े आयोजनों की तैयारी
सोनभद्र। आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम एक शुरुआत है। आने वाले समय में समाज की समस्याओं को लेकर और भी बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि समाज की आवाज़ को मजबूती से उठाने के लिए संगठन और संवाद दोनों जरूरी हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आयोजकों ने सभी समाजबंधुओं का आभार जताया और कहा कि जिस तरह से हजारों लोग स्वेच्छा से इस समागम में शामिल हुए, उससे यह साफ है कि समाज में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। रामलीला मैदान में आयोजित विप्र समागम सहभोज कार्यक्रम ने यह साफ संदेश दिया कि ब्राह्मण समाज अब अपनी स्थिति, सम्मान और अधिकारों को लेकर सजग, संगठित और सक्रिय हो रहा है। यह आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की सोच और दिशा को दर्शाने वाला कदम माना जा रहा है। हजारों लोगों की मौजूदगी, खुलकर हुई चर्चा और एकजुटता ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में ब्राह्मण समाज अपनी भूमिका को लेकर निर्णायक और प्रभावी नजर आएगा।
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