पब्लिक भारत डेस्क
सोनभद्र। जहां पत्थर टूटते हैं, लेकिन इस बार खामोशी टूटी है। आयकर विभाग की अब तक की सबसे हाईटेक और व्यापक कार्रवाई ने खनन साम्राज्य की नींव हिला दी है। ड्रोन कैमरे सैटेलाइट इमेज डिजिटल मैपिंग और शादी के स्टिकर लगी गाड़ियां। जी हां, फिल्मी अंदाज में चला यह ऑपरेशन असल में एक बड़ा आर्थिक और तकनीकी शिकंजा है। अकेले सोनभद्र में 14 ठिकानों पर छापेमारी लगभग 25 गाड़ियों का काफिला 100 से ज्यादा अधिकारी सवाल सीधा है क्या खनन पट्टे की सीमा से ज्यादा गहराई तक धरती को छलनी किया गया? क्या यह सिर्फ टैक्स जांच है या अवैध खनन के नेटवर्क पर बड़ा वार?

देखिए हमारी खास रिपोर्ट
सोनभद्र। खनन बेल्ट सोनभद्र में पहली बार आयकर विभाग ने टेक्नोलॉजी का ऐसा इस्तेमाल किया है, जो अब तक सिर्फ कागजों में होता था। ड्रोन कैमरों से खदानों की लाइव मैपिंग सैटेलाइट इमेज के जरिए जियो-लोकेशन मिलान और जिला खनिज विभाग के पट्टा दस्तावेजों का जमीनी हकीकत से सीधा तुलना। शिकायत थी तय गहराई से ज्यादा खनन। जवाब में प्रदेशव्यापी एक्शन। लेकिन सबसे बड़ा फोकस सोनभद्र में आधा दर्जन से अधिक बड़े खनन कारोबारियों के आवास और दफ्तरों पर एक साथ दबिश। सूत्रों की माने तो अजय सिंह , चंद्रभूषण गुप्ता , एसके चौबे , इश्तियाक खां , छात्र शक्ति इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य के यहां छापेमारी हुई है। आपको बता दें की ऑपरेशन इतना गोपनीय कि कई गाड़ियों पर शादी समारोह के स्टिकर चिपकाए गए ताकि भनक तक न लगे। अब जांच खदानों के भीतर तक पहुंच चुकी है। यह कार्रवाई वाराणसी जोन के ज्वाइंट डायरेक्टर प्रांजल सिंह के नेतृत्व में चल रही है। प्रदेश के 20 से 22 ठिकानों पर छापेमारी और अकेले सोनभद्र में करीब 14 लोकेशन जांच के घेरे में। करीब 100 से अधिक अधिकारी अलग- अलग टीमों में बंटकर दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग ट्रेल खंगाल रहे हैं। यह सिर्फ सर्वे नहीं यह डेटा आधारित जांच है।

डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों में गड़बड़ी साबित हुई तो कार्यवाई तय
सोनभद्र। ओबरा थाना क्षेत्र में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच पत्थर खदानों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। ड्रोन से पूरी खदान की 3D मैपिंग GPS आधारित गहराई का आकलन और स्वीकृत सीमा से तुलना। छात्र शक्ति डाला लंगड़ा मोड़ स्थित बंद खदान नंबर तीन, जिसे उमाशंकर सिंह से जुड़ा बताया जा रहा है, वहां भी टीम ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। अधिकारियों ने कैमरे पर कुछ नहीं कहा लेकिन इतना साफ है शिकायतें गंभीर हैं और जांच गहरी। सूत्रों की मानें तो अगर डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों में गड़बड़ी साबित हुई तो कार्रवाई भी वैसी ही सख्त होगी। शादी के स्टिकर लगी गाड़ियों से शुरू हुआ यह ऑपरेशन अब प्रदेश की सबसे बड़ी तकनीकी खनन जांच के रूप में उभर रहा है। सवाल अभी भी वही है धरती कितनी गहरी खोदी गई और कानून कितना मजबूत साबित होगा?।

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