सोनभद्र। इतिहास के प्रमाण बनाम आस्था की परंपरा, सच की तलाश में प्रशासन

Share

AKD।गिरीश तिवारी

सोनभद्र। जिले का प्राचीन विजयगढ़ किला, जो सदियों से इतिहास, रहस्य और आस्था का प्रतीक रहा है, आज एक नए विवाद के कारण सुर्खियों में है। कैमूर की ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित यह किला अब एक सरोवर और उससे जुड़ी धार्मिक पहचान को लेकर दो पक्षों के बीच टकराव का केंद्र बन गया है। मामला इतना बढ़ चुका है कि इसकी गूंज सीधे योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

विजयगढ़ किला सोनभद्र जिले में रॉबर्ट्सगंज के पास स्थित एक प्राचीन दुर्ग है, जिसका निर्माण लगभग 5वीं शताब्दी में कोल राजाओं द्वारा कराया गया माना जाता है। यह किला कैमूर की ऊंची चट्टानी पहाड़ियों से घिरा हुआ है और करीब 400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो इसे सामरिक रूप से बेहद मजबूत बनाता था।

इस किले की सबसे बड़ी खासियत इसकी रहस्यमयी संरचना है। किले के भीतर गुफाएं, शिलालेख, मूर्तियां और प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली आज भी मौजूद हैं। यहां चार से सात तक बारहमासी तालाबों का उल्लेख मिलता है, जिनमें राम सागर और मीरा सागर (कुछ स्रोतों में यही नाम मिलता है) प्रमुख हैं।

इतिहास के साथ-साथ यह किला साहित्यिक दृष्टि से भी खास महत्व रखता है। इसे प्रसिद्ध उपन्यास चंद्रकांता से जोड़ा जाता है, जिसके कारण इसे “तिलस्मी किला” कहा जाने लगा। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार किले में गुप्त रास्ते और रहस्यमयी संरचनाएं आज भी मौजूद हैं, जो इसकी पहचान को और अनोखा बनाती हैं।

विवाद की जड़ किले के एक सरोवर को लेकर है। जहां एक पक्ष इसे “किरण सागर” बताता है, वहीं ऐतिहासिक दस्तावेजों और कुछ स्रोतों में “मीरा सागर” नाम का उल्लेख मिलता है।
इसी सरोवर के किनारे स्थित एक मजार को लेकर विवाद गहरा गया है।

ऐतिहासिक स्रोत बताते हैं कि किले के मुख्य द्वार के पास एक सूफी संत सैय्यद जैन-उल-अबदीन, जिन्हें “मीर साहिब” या “मीरान साहिब” के नाम से जाना जाता है, की दरगाह मौजूद है और यहां हर वर्ष उर्स का आयोजन होता है, जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं।

यहीं से विवाद और पेचीदा हो जाता है। एक पक्ष का आरोप है कि किले के इतिहास के साथ छेड़छाड़ करते हुए सरोवर का नाम बदलकर “मिरन सागर” कर दिया गया और मजार को नया स्वरूप दिया गया। वहीं दूसरा पक्ष इसे सदियों पुरानी परंपरा और आस्था का हिस्सा बताता है, जहां वर्षों से धार्मिक आयोजन होते आ रहे हैं।

इस मामले ने राजनीतिक रंग तब लिया जब भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर जांच की मांग की। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सोनभद्र प्रशासन सक्रिय हुआ और जिलाधिकारी द्वारा चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी गई, जिसमें राजस्व, वन और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं।स्थानीय स्तर पर भी यह मुद्दा केवल नाम या संरचना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब इतिहास बनाम आस्था की बहस में बदल चुका है। एक ओर लोग किले की मूल ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने की बात कही जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विजयगढ़ किला केवल एक ऐतिहासिक ढांचा नहीं, बल्कि यह पूर्वांचल की सांस्कृतिक धरोहर है। यहां मौजूद शिलालेख, जल संरचनाएं और प्राचीन स्थापत्य कला इस बात का प्रमाण हैं कि यह स्थल शोध और संरक्षण दोनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।अब पूरा मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में है और सभी की निगाहें उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि विजयगढ़ किले में हो रहा बदलाव इतिहास के विपरीत है या यह परंपराओं का हिस्सा।

सोनभद्र का यह तिलस्मी किला एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि इतिहास कभी खत्म नहीं होता, वह समय-समय पर नए सवाल खड़े करता है और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ चुनौती भी देता है।

Author Profile

Public Bharat News
Public Bharat News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *