अरविंद दूबे /गिरीश तिवारी
सोनभद्र। सूबे के सबसे अंतिम छोर पर स्थित इस जिले में कई सरकारी विद्यालय है जिसमें पढने वाले नौनिहालों का भविष्य पर हमेशा खतरे की घंटी लटकती रहती है। खतरा भी ऐसा है जिसका किसी के पास कोई उपाय भी नही है, जिसकी वजह से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। कई स्कूलों की छत के ऊपर से हाईटेंशन तार गुजर रहा है जिसकी वजह से हमेशा यहां खतरा मंडराता रहता है और नौनिहाल अपनी जान हथेली पर रखकर पढ़ाई करने आते हैं। वहीं अधिकारी भी गोलमोल जवाब देकर बचने की कोशिश करते हैं। इसकी वजह से कई बार हादसा भी हो चूका है जिसके एवज में नौनिहालों को अपनी जान भी गवानी पड़ी है लेकिन न जाने क्यों प्रशासनिक अमला मेहबान बना हुआ है बिजली विभाग है तो कान में तेल डालकर सो रहा है। देखा जाय तो जिले में कई ऐसे स्कूल हैं जिनके ऊपर से हाईटेंशन तार गुजर रही है, कई स्थानों पर ये काफी जर्जर हालत में हैं। आलम ये है कि ये कभी भी टूटकर नीचे गिर सकते हैं। ऐसा हुआ तो कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में इसकी चपेट में कौन कब आ जाए, कोई भरोसा नहीं। ऐसा नहीं है कि इसकी वजह से पहले कभी कोई हादसा नहीं हुई है। करीब तीन वर्ष पूर्व दुद्धी तहसील क्षेत्र के मेदनीखाड गांव के रहने वाले 13 साल के नीरज का एक हाथ व एक पैर यहां के स्कूल में पढ़ाई के दौरान हाईटेंशन की चपेट में आ गया था, जिसकी वजह से इन्हें हमेशा की लिए काटना पड़ा था।
सैकड़ों स्कूलों के ऊपर से गुजर रही है हाईटेंशन तार
जिले में 2061 परिषदीय विद्यालय संचालित है। इनमें से कई स्कूल ऐसे हैं जिनके ऊपर से हाईटेंशन तार गुजर रही है. इसको हटाने के लिए शिक्षा विभाग ने पत्राचार शुरू कर मौन साध लिया शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 378 स्कूल ऐसे हैं जिनके ऊपर से हाईटेंशन तार गुजर रहा है शिक्षक उच्चाधिकारियों को कई बार इन तारों को हटाने के लिए प्रार्थना पत्र दे चुके हैं लेकिन इस पर अभी तक कोई बात नहीं बन सकी है। ऐसे में जुलाई से एक ओर जहां पठन-पाठन शुरू होगा तो सिस्टम की बेरुखी से स्कूलों के इस हालात से बच्चों की जान को हर समय खतरा बना रहेगा। जिले का शिक्षा विभाग एक तरफ इस मामले पर पत्र लिखकर मौन हो गया है तो वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग ने बजट न होने का हवाला देकर चुप्पी साध साध ली है। परिषदीय विद्यालय के ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन लाइन के तार को हटाने के लिए बिजली विभाग ने शिक्षा विभाग से करोड़ों की मांग की है। जिस पर बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से एक वर्ष पूर्व निदेशालय को स्थिति से अवगत कराते हुए धन की मांग की गई है। मगर शासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई है, जिसकी वजह से यहां से खंभे नहीं हटाए गए हैं और न ही इसका किसी के पास कोई समाधान है।
हो सकता है बड़ा हादसा
परिषदीय स्कूलों के ऊपर से जो हाईटेंशन लाइन जा रही है उन तारों के पावर कॉरपोरेशन की तरफ से करंट से बचाव का कोई प्रबंध नहीं किया गया है। हाइटेंशन के नीचे जाली भी नहीं लगी है। ऐसे में अगर कभी किसी विद्यालय में पर तार टूटता है तो सीधे जमीन पर गिरेगा। विद्यालयों के प्रिंसिपल भी कई बार बीएसए को इसके लिए लिख चुके हैं। बेसिक शिक्षा विभाग व बिजली विभाग दोनों ही इस पर टालमटोल कर जाते हैं।
हाईटेंशन तारों पर अफसरों की खानापूर्ति
इस मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि जिले बिजली उत्पादन का केंद्र है और यहां पर बिजली के तारों का बहुत बड़ा जाल है। यहां पर सैकड़ो स्कूलों के ऊपर से हाईटेंशन तार गुजर रहे हैं। वह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अभी कहा कि तारों को हटाने के लिए बिजली विभाग को दो बार डीएम के माध्यम से पत्र लिखा जा चुका है लेकिन बिजली विभाग बजट न होने की बात कह कर डाल देता है इस समय फिर से जिला अधिकारी से बात किया जाएगा।
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