(आचार्य प्रशान्त मिश्र वैदिक)

सोनभद्र। इस बार भी होलिका दहन पर भद्राकाल का साया है। आचार्य ने बताया कि हिंदू धर्म में होली का विशेष महत्व है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन का उत्सव मनाया जाता है। इसके अगले दिन को रंगोत्सव होली के नाम से जाना जाता है। आचार्य प्रशान्त मिश्र जी ने बताया कि पंचांग अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा के साथ भद्रा का साया रहेगा। इस समय किए गए कार्य में शुभ फल की की प्राप्ति नहीं होती है। इसी वजह से भद्रा काल के समय शुभ और मांगलिक काम न करने की सलाह दी जाती है। होलिका दहन 13 मार्च गुरुवार को फाल्गुन की पूर्णिमा गुरुवार की सुबह 10:11 बजे प्रारंभ होगी, साथ ही भद्रा भी उसी समय से शुरू हो रही है। भद्रा गुरुवार की रात 10:37 बजे तक विद्यमान रहेगी। होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई के जीत के तौर पर मनाया जाता है और हर वर्ष यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि विधि पूर्वक और नियमों के साथ होलिका दहन किया जाए तो सभी चिंता व परेशानियां भी उसी अग्नि में स्वाहा हो जाती हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
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