डाला/सोनभद्र(अरविंद दुबे, गिरीश तिवारी)-
सोशल मीडिया की बेलगाम अभिव्यक्ति जब मर्यादा और संवेदनशीलता की सीमा लांघती है, तो उसका जवाब प्रशासन को देना ही पड़ता है। चोपन विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय मालोघाट में कार्यरत सहायक अध्यापिका जेबा अफरोज ने जिस लापरवाही से शहीदों पर आपत्तिजनक पोस्ट साझा की, उसने पूरे जनपद में आक्रोश की लहर दौड़ा दी। मामला सामने आते ही बीएसए मुकुल आनंद पांडेय ने बिना समय गंवाए कार्रवाई की, शिक्षिका को तत्काल निलंबित कर रानीतालि बैरियर विद्यालय से संबद्ध किया और जांच म्योरपुर के खंड शिक्षा अधिकारी को सौंप दी। 15 दिनों के भीतर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।आरोप यही नहीं रुके। शिकायत में कुछ और सोशल मीडिया पोस्टों का भी हवाला दिया गया, जिनमें “गुलफाम की हत्या से संबंधित” टिप्पणियों के साथ-साथ “गद्दार सच्चे, वफादार मुसलमान” जैसे भड़काऊ शब्द शामिल थे। शिक्षिका ने सफाई में दावा किया कि उन्होंने ऐसे विचारों का समर्थन नहीं किया, बल्कि विरोध जताने के लिए पोस्ट साझा की थी। परंतु यह तर्क जिम्मेदारी के उस मानदंड पर खरा नहीं उतरा, जिसकी अपेक्षा एक शिक्षक जैसे संवेदनशील पद से की जाती है।प्रकरण ने पूरे जिले में यह स्पष्ट कर दिया है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर राष्ट्रीय बलिदानों का अपमान सहन नहीं किया जाएगा। शिक्षकों से मर्यादा, विवेक और संयम की अपेक्षा न सिर्फ विद्यालयों में, बल्कि सार्वजनिक जीवन में भी की जाती है। यह मामला न केवल शासन की संवेदनशीलता का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी है कि शहीदों के सम्मान में उठे हर सवाल का जवाब अब सख्ती से दिया जाएगा।
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