कोन/सोनभद्र(AKD/गिरीश तिवारी)-
कोन विकासखंड अंतर्गत रोहिनवा दामर गांव में दूषित पेयजल लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। गांव के पानी में मानक से कई गुना अधिक फ्लोराइड पाए जाने से कई लोग अपंगता और गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। इसका सबसे दर्दनाक उदाहरण 27 वर्षीय रिंकी उरांव हैं।रिंकी की मां सोमरिया देवी के अनुसार रिंकी तीन वर्ष की उम्र तक पूरी तरह स्वस्थ थी। वह सामान्य बच्चों की तरह चलती-फिरती और खेलती थी। लेकिन तीन साल के बाद फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन से उसके शरीर में बदलाव आने लगे। धीरे-धीरे उसकी हड्डियां जकड़ती चली गईं और चार-पांच साल की उम्र तक वह पूरी तरह बिस्तर पर निर्भर हो गई, स्थिति यह है कि रिंकी के दोनों हाथ-पैर काम नहीं करते। चलने के लिए उसे जमीन पर शरीर घसीटना पड़ता है। 27 वर्ष की उम्र होने के बावजूद उसका शारीरिक विकास रुक गया है और वह देखने में 10–12 वर्ष की बच्ची जैसी लगती है।इतनी गंभीर हालत के बावजूद रिंकी को विकलांगता पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। परिजनों का कहना है कि बैंक में केवाईसी की समस्या के कारण खाता बंद है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा। नियमित इलाज की कोई ठोस व्यवस्था भी नहीं है।ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में रिंकी जैसी स्थिति वाले कई लोग हैं, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।यह मामला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करता है। सवाल यह है कि आखिर कब तक इस गांव के लोग ज़हरीला पानी पीने को मजबूर रहेंगे और कब उन्हें शुद्ध पानी व बेहतर इलाज मिल पाएगा।
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