यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सोनभद्र में उबाल, सवर्ण समाज का कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन

Share

सोनभद्र (AKD/गिरीश तिवारी)-उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026 के विरोध में सवर्ण समाज और छात्र संगठनों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में जुटे लोग कलेक्ट्रेट गेट से पैदल मार्च करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचे

हाथों में तख्तियां, जुबां पर नारे और आंखों में आक्रोश लिए प्रदर्शनकारियों से पूरा परिसर यूजीसी विरोधी नारों से गूंज उठा।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 13 जनवरी 2026 से लागू यह नियम समानता के नाम पर उच्च शिक्षा में विभाजन को बढ़ावा देगा और सामान्य वर्ग के छात्रों व शिक्षकों के भविष्य पर गहरा असर डालेगा। मार्च के दौरान “सवर्ण विरोधी यूजीसी नियम वापस लो” जैसे नारे लगाए गए और सरकार से तत्काल पुनर्विचार की मांग की गई।प्रदर्शन के दौरान सवर्ण आर्मी के जिलाध्यक्ष ने बेहद सख्त और भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि यूजीसी का नया नियम समानता नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जानबूझकर किया गया विभाजन है।

सरकार एक ओर समान अवसर की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर ऐसा नियम ला रही है, जो सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को असुरक्षित बना देगा। अशोक दुबे ने कहा कि 2012 में जो प्रावधान झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई के लिए बनाया गया था, उसे हटाकर अब बेगुनाह शिक्षकों और छात्रों को डर के माहौल में धकेल दिया गया है। अब यदि किसी के खिलाफ झूठी शिकायत होती है और वह गलत साबित भी हो जाए, तो शिकायतकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, जो न्याय की भावना के बिल्कुल विपरीत है।उन्होंने चेतावनी दी कि इस नियम से विश्वविद्यालय और महाविद्यालय शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि विवाद और तनाव के केंद्र बन जाएंगे।

शिक्षक अपने कर्तव्य निभाने से डरेंगे और छात्र पढ़ाई छोड़कर जातिगत संघर्ष में उलझेंगे। अशोक दुबे ने साफ कहा कि यदि सरकार ने समय रहते यह नियम वापस नहीं लिया, तो सवर्ण समाज और छात्र संगठन शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे और यह संघर्ष सड़क से लेकर संसद तक जाएगा।वहीं छात्र नेता अभिषेक अग्रहरि ने यूजीसी नियमों को छात्रहित के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जाति के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा और छात्र एकता कमजोर होगी। प्रदर्शन के दौरान एक भावनात्मक क्षण तब सामने आया, जब सवर्ण आर्मी के जिलाध्यक्ष अशोक दुबे ने जिलाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम खून से लिखा गया रक्तपत्र सौंपा, जिसमें यूजीसी नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नए नियमों से कानून के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है, खासकर सामान्य वर्ग के खिलाफ। कुल मिलाकर यूजीसी के नए नियमों को लेकर सोनभद्र में माहौल पूरी तरह गर्म है और सवर्ण समाज व छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार ने समय रहते फैसला नहीं बदला, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

Author Profile

Public Bharat News
Public Bharat News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *