AKD/गिरीश तिवारी
सोनभद्र । जनपद में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने दौरे के दौरान पीड़ित महिलाओं की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब महिलाओं के लिए पहले की अपेक्षा अधिक सुरक्षित हुआ है, लेकिन समाज में होने वाली अधिकांश घटनाएं परिवार के भीतर की होती हैं, इसलिए महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि महिला और पुरुष गाड़ी के दो पहियों की तरह हैं और परिवार, समाज तथा देश का विकास तभी संभव है जब दोनों एक साथ चलें और एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को समझें।डॉ. चौहान ने बच्चों में बढ़ते मोबाइल एडिक्शन पर भी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि कक्षा पांच तक के बच्चों को मोबाइल न देने और स्कूलों से मोबाइल पर होमवर्क न दिए जाने का निर्देश दिया गया है, क्योंकि मोबाइल की लत का असर बच्चों की याददाश्त और पढ़ाई पर पड़ रहा है।महिलाओं की नसबंदी पुरुष डॉक्टरों द्वारा किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के पेशे की तुलना अन्य निजी संस्थानों से नहीं की जा सकती। डॉक्टर एक सम्मानजनक पेशा है और उनके द्वारा महिला मरीजों के शोषण या ब्लैकमेल जैसी शिकायतें सामने नहीं आती हैं। इसके विपरीत प्राइवेट जिम और पार्लर जैसे स्थानों पर महिलाओं के शोषण, ब्लैकमेल और यहां तक कि हत्या तक की घटनाएं सामने आई हैं, इसलिए यह निर्णय लिया गया कि जहां महिलाओं को सेवाएं दी जाती हैं वहां महिलाओं द्वारा ही सर्विस प्रदान की जाए।जिले में विभिन्न समितियों के कार्यों के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थाओं की समितियां अपना कार्य कर रही हैं, लेकिन समय-समय पर उनकी समीक्षा जरूरी है ताकि व्यवस्थाओं में और सुधार किया जा सके।
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