अल्ट्राटेक की जहरीली बदबू से घूट रहा डाला का दम, व्यापारियों ने दुकानें बंद कर दी आर-पार की चेतावनी

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HIGHLIGHTS
  • डाला/सोनभद्र(AKD/गिरीश तिवारी):-स्थानीय अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री से निकल रही असहनीय दुर्गंध अब नगरवासियों के लिए मुसीबत
  • का सबब बन गई है।
  • फैक्ट्री में जलाए जा रहे कचरे से फैल रही बदबू से नाराज व्यापारियों और स्थानीय लोगों का गुस्सा गुरुवार को फूट पड़ा।
  • विरोध स्वरूप दुकानदारों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए और रामलीला मैदान में एकत्र होकर कंपनी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले एक साल से अल्ट्राटेक कंपनी द्वारा बाहरी जिलों…
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डाला/सोनभद्र(AKD/गिरीश तिवारी):-
स्थानीय अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री से निकल रही असहनीय दुर्गंध अब नगरवासियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। फैक्ट्री में जलाए जा रहे कचरे से फैल रही बदबू से नाराज व्यापारियों और स्थानीय लोगों का गुस्सा गुरुवार को फूट पड़ा। विरोध स्वरूप दुकानदारों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए और रामलीला मैदान में एकत्र होकर कंपनी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले एक साल से अल्ट्राटेक कंपनी द्वारा बाहरी जिलों से ट्रकों में भरकर गीला और सूखा कचरा मंगवाया जा रहा है। सीमेंट उत्पादन की प्रक्रिया में जब इस कचरे को जलाया जाता है, तो उससे इतनी भयंकर दुर्गंध उठती है कि बाजार और आसपास के गांवों में लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। इस प्रदूषित हवा का सीधा असर अब बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सेहत पर पड़ रहा है।
सांकेतिक प्रदर्शन के बाद बड़े आंदोलन की तैयारी
गुरुवार को हुए इस प्रदर्शन में शहर के युवाओं और संभ्रांत नागरिकों ने एक स्वर में प्रशासन और कंपनी को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सांकेतिक विरोध था। यदि कंपनी ने जल्द ही कचरा जलाना बंद नहीं किया और हवा को दुर्गंध मुक्त नहीं किया, तो नगरवासी आमरण अनशन और विशाल धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। इस दौरान अंशु पटेल, अवनीश देव पाण्डेय, प्रशांत पाल, विनीत पांडेय, अमित सिंह, मोहित पाठक, शारदा अग्रहरि और विमलेश केशरी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

जांच के नाम पर ‘सेंट’ छिड़ककर गुमराह करने का आरोप
“जांच टीम आते ही बदल जाता है फैक्ट्री का माहौल”
विरोध कर रहे लोगों ने स्थानीय प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन की मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि जब भी प्रशासन से शिकायत की जाती है और कोई अधिकारी जांच के लिए आता है, तो फैक्ट्री प्रबंधन चालाकी से कचरा जलाना बंद कर देता है। इतना ही नहीं, दुर्गंध को छिपाने के लिए भारी मात्रा में ‘सेंट’ (खुशबू) का छिड़काव कर दिया जाता है। इस तरह जांच रिपोर्ट को अपने पक्ष में करवा लिया जाता है, जबकि अधिकारी के जाते ही स्थिति फिर से नारकीय हो जाती है। नगरवासियों का कहना है कि अब वे इस ‘आंख मिचौली’ के खेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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