देश को एशिया कप दिलाने वाला दिव्यांग खिलाड़ी आज सहारे को मोहताज

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HIGHLIGHTS
  • सोनभद्र (AKD/गिरीश तिवारी)-अनपरा की धरती से निकले अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेटर लव वर्मा ने वह कर दिखाया, जिसका सपना हर खिलाड़ी देखता है।
  • 13 फरवरी 2015 को पांच देशों के दिव्यांग एशिया कप में भारत
  • को चैंपियन बनाने में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई।
  • इससे पहले और बाद में भी उन्होंने 14 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया।
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सोनभद्र (AKD/गिरीश तिवारी)-अनपरा की धरती से निकले अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेटर लव वर्मा ने वह कर दिखाया, जिसका सपना हर खिलाड़ी देखता है। 13 फरवरी 2015 को पांच देशों के दिव्यांग एशिया कप में भारत को चैंपियन बनाने में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई। इससे पहले और बाद में भी उन्होंने 14 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। 2014 में श्रीलंका दौरे पर मैन ऑफ द सीरीज, 2019 में नेपाल के खिलाफ कप्तान रहते ऐतिहासिक जीत, 2021 में शारजाह में दिव्यांग प्रीमियर लीग में मैन ऑफ द मैच और 2022 23 में लगातार अंतरराष्ट्रीय सफलताएं उनके खेल जीवन की बड़ी उपलब्धियां हैं।3 दिसंबर 2021 को विश्व दिव्यांग दिवस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी पुरुष वर्ग में राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया।

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उन्हें दिव्यांग रत्न, खेल रत्न सहित कई सम्मानों से नवाजा गया। मंचों पर तालियां बजीं, प्रशस्ति पत्र मिले, लेकिन सम्मान के बाद भी उनके जीवन की जमीनी सच्चाई नहीं बदली।आज वही अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी स्थायी रोजगार और आवास के लिए संघर्ष कर रहा है। पिछले चार वर्षों से वे साधारण झोपड़ी में रहकर अनपरा के सीआईएसएफ मैदान में बच्चों को क्रिकेट प्रशिक्षण दे रहे हैं। 250 से अधिक मैचों का आयोजन कर उन्होंने सैकड़ों प्रतिभाओं को मंच दिया, कई युवाओं को खेल की दिशा दी, लेकिन स्वयं के लिए कोई मजबूत सहारा नहीं जुटा सके,राज्यपाल से लेकर केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों तक उन्होंने अनेक बार गुहार लगाई। आश्वासन मिले, मुलाकातें हुईं, पत्र लिखे गए, लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आया।

पिता के निधन के बाद उनकी पारिवारिक और आर्थिक स्थिति और कमजोर हो गई है।जब देश में खिलाड़ियों के लिए योजनाओं और प्रोत्साहनों की घोषणाएं हो रही हैं, तब सोनभद्र का यह अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग खिलाड़ी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता दिखाई दे रहा है। यह केवल एक खिलाड़ी की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के लिए प्रश्न है जो प्रतिभाओं को सम्मान तो देती है, पर सुरक्षा और स्थायित्व नहीं।अब समय है कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले को प्राथमिकता से संज्ञान में लेकर इस खिलाड़ी को रोजगार और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करें, ताकि देश का नाम रोशन करने वाली यह प्रतिभा सम्मानजनक जीवन जी सके और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे।

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