सात दिन.. सात मौतें डाला नगर पंचायत में पसरा मातम, हर गली में उठी रुदन की आवाज़

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  • डाला/सोनभद्र(अरविंद दुबे,गिरीश तिवारी)-डाला नगर पंचायत
  • क्षेत्र इन दिनों किसी भारी मनहूस साए से गुजर रहा है।
  • बीते सात
  • दिनों में सात
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डाला/सोनभद्र(अरविंद दुबे,गिरीश तिवारी)-
डाला नगर पंचायत क्षेत्र इन दिनों किसी भारी मनहूस साए से गुजर रहा है। बीते सात दिनों में सात अलग-अलग परिवारों ने अपने-अपने घरों के चिराग खो दिए। कहीं अचानक आई बीमारी ने अपनों को छीन लिया, तो कहीं एक तेज़ रफ्तार पहिए ने किसी की सांसें रोक दीं। पूरा इलाका जैसे खामोश मातम में लिपटा हुआ है हर गली से निकलती सिसकियाँ, हर चेहरे पर पसरा ग़म और हर दरवाज़े पर चिपका शोक संदेश।सबसे दिल दहला देने वाली घटना वार्ड नंबर 7 से आई, जहां स्वर्गीय केशवराम के पुत्र बेचू की चंदौली में एक सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। रोज़ की तरह घर से निकले बेचू को क्या पता था कि यह उनका आख़िरी सफ़र होगा। बेकाबू रफ्तार और लापरवाही ने उनकी ज़िंदगी को पलभर में खत्म कर दिया। पीछे छूट गया एक बिखर चुका परिवार, आंखों में आंसू और दिल में टीस लिए।इसी वार्ड की एक और मार्मिक कहानी है नगर पंचायत की सभासद दीक्षा पटेल की माता रोमा देवी की।स्वस्थ, कर्मठ और मिलनसार रहीं रोमा देवी पत्नी आज़ाद भाई पटेल अचानक अस्वस्थ हुईं। बेटे अंशु पटेल ने उन्हें तुरंत वाराणसी के एक नामचीन निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्होंने कई दिन जिंदगी से संघर्ष किया, लेकिन बीते रविवार को अंतिम सांस ली। रोमा देवी न सिर्फ अपने परिवार की धुरी थीं, बल्कि मोहल्ले में भी उनका सम्मान था। उनके जाने से न केवल घर, बल्कि पूरा वार्ड जैसे सूना हो गया है। शोक की लहर में दीक्षा पटेल भी अपनी मां के अंतिम स्पर्श को याद करते हुए टूट सी गई हैं।इसी वार्ड के श्याम बिहारी जी, जो काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे, उनका भी दुखद निधन हुआ। वे बेहद सज्जन, सरल स्वभाव और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। मोहल्ले में उनके जाने से सन्नाटा पसर गया है।वार्ड नंबर 4 में भी गम का माहौल गहराया, जब नागेश्वर प्रसाद की अचानक तबीयत बिगड़ी और अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उनकी सांसें थम गईं। वे अपने सरल और सौम्य स्वभाव के लिए जाने जाते थे। मोहल्ले के लोगों ने उन्हें हमेशा एक बड़े-बुजुर्ग की तरह सम्मान दिया।वार्ड नंबर 5 भी इस दुख की श्रृंखला से अछूता नहीं रहा।बजरंगी लाल जी की पत्नी लालमुनी और दुखहरन जी की पत्नी शांति दोनों ने बीमारी से जूझते हुए दम तोड़ दिया। दोनों महिलाएं अपने-अपने परिवार की रीढ़ थीं। उनके जाने से घर की रसोई में चूल्हा भी शांत हो गया, और परिवारों की मुस्कान मानो साथ ही चली गई।अंतिम और कम उम्र की सबसे पीड़ादायक मौत हुई वार्ड नंबर 10 कोलान बस्ती में।मल्लू, जिसकी उम्र महज़ 25–26 साल थी, किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। उसका निधन पूरे मोहल्ले को गहरे शोक में डुबो गया। एक युवा की असमय मौत ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि काश इलाज समय पर और प्रभावशाली होता।इन सात दिनों में सात असमय विदाई ने नगर पंचायत को हिला कर रख दिया है। हर सुबह एक ताज़ा मातम, हर शाम एक नया रोता हुआ घर। लोगों की मांग है कि प्रशासन मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता दे, बीमारी और सड़क सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए और हर वार्ड में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त किया जाए।

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