
सोनभद्र(अरविंद दुबे,गिरीश तिवारी)-सोनभद्र का जल संकट अब किसी से छुपा नहीं है। बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र (ओबरा, डाला) में खदानों से पानी का बेतहाशा दोहन हो रहा है, जो एक गंभीर संकट का रूप ले चुका है। राजेश फरीदा नामक पत्थर खदान में पाइप के जरिए पानी नालियों में बहाया जा रहा है, जो न केवल आसपास के क्षेत्रों में जल संकट को गहरा रहा है, बल्कि लोगों की पीने के पानी की समस्या को भी गंभीर बना रहा है।पानी के इस अत्यधिक दोहन से भूगर्भ जल का स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है, और इस कारण स्थानीय लोगों को पीने के पानी तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

जहां एक ओर सरकार ‘हर घर जल योजना’ के तहत पानी की सुविधा पहुंचाने का प्रयास कर रही है, वहीं खनन से हो रहे पानी के इस अव्यवस्थित दोहन से सरकारी योजनाएं फेल साबित हो रही हैं।सोनभद्र में जल संकट की स्थिति दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है, और अधिकारियों की लापरवाही इस संकट को और भी गहरा रही है।

सोनभद्र के लाखों लोग इस संकट के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से इस गंभीर समस्या को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह जल संकट अब अनियंत्रित हो जाएगा, या फिर प्रशासन इसे रोकने के लिए समय रहते कुछ करेगा। समय बतायेगा, लेकिन फिलहाल यह जल संकट सोनभद्र के लोगों के लिए सिरदर्द बन चुका है।
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