सोनांचल बार एसोसिएशन में ऐतिहासिक कार्रवाई: समानांतर बार गठन करने वाले 25 अधिवक्ता छह वर्षों के लिए निष्कासित

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HIGHLIGHTS
  • ओबरा, सोनभद्र(अरविंद दुबे,गिरीश तिवारी)-सोनांचल बार एसोसिएशन में अनुशासन और गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले एक गंभीर और सोचे-समझे षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ है।
  • बार के संवैधानिक नियमों की खुली अवहेलना करते हुए कुछ अधिवक्ताओं ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से ‘उर्जांचल बार एसोसिएशन’ के नाम से एक समानांतर संगठन का गठन किया, जिसे सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में प्रचारित
  • कर सोनांचल बार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई गई।बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता अवधेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में बुलाई गई आमसभा में यह निर्णय लिया गया कि यह कृत्य साजिशन, जानबूझकर और अपमानजनक रूप…
  • इसे संगठन की छवि धूमिल करने का ‘अक्षम्य अपराध’ करार देते हुए, आमसभा में सर्वसम्मति से 25 अधिवक्ताओं को तत्काल प्रभाव से 6 वर्षों के लिए बार की सदस्यता से निष्कासित
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ओबरा, सोनभद्र(अरविंद दुबे,गिरीश तिवारी)-
सोनांचल बार एसोसिएशन में अनुशासन और गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले एक गंभीर और सोचे-समझे षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ है। बार के संवैधानिक नियमों की खुली अवहेलना करते हुए कुछ अधिवक्ताओं ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से ‘उर्जांचल बार एसोसिएशन’ के नाम से एक समानांतर संगठन का गठन किया, जिसे सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में प्रचारित कर सोनांचल बार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई गई।बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता अवधेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में बुलाई गई आमसभा में यह निर्णय लिया गया कि यह कृत्य साजिशन, जानबूझकर और अपमानजनक रूप से किया गया, जो न केवल बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों, बल्कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120बी, 406, 420 तथा सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 26 व 27 का भी खुला उल्लंघन है।आरोप है कि सत्र 2025–26 के चुनाव में असफलता के बाद इन अधिवक्ताओं ने पराजय की खीझ निकालते हुए सोनांचल बार की एकता को तोड़ने का दुस्साहस किया। इसे संगठन की छवि धूमिल करने का ‘अक्षम्य अपराध’ करार देते हुए, आमसभा में सर्वसम्मति से 25 अधिवक्ताओं को तत्काल प्रभाव से 6 वर्षों के लिए बार की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया।निष्कासित अधिवक्ताओं की सूची में पूर्व अध्यक्ष, पूर्व महामंत्री, पूर्व कोषाध्यक्ष से लेकर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी तक शामिल हैं। जिन प्रमुख नामों को निष्कासन का दंड मिला है, उनमें रमाशंकर सिंह, कपूर चन्द पाण्डेय, पुष्पराज पाण्डेय, संजीत कुमार चौबे, सुधीर कुमार श्रीवास्तव, बुद्धिनारायण जायसवाल, संतोष कुमार जैन, सुशील कुमार शर्मा, गजेन्द्र यादव, मनोज कुमार पाठक, अश्वनी कुमार सिंह, अनिल कुमार मिश्रा, उमेश चन्द्र शुक्ला, सुशील कुमार पाण्डेय, मिथिलेश तिवारी, मनीष मिश्रा, नन्दलाल पाठक, जे.एन. चौबे, दिनेश कुमार पाण्डेय, निखिल तिवारी, अनिल राय, राजीव कुमार दत्ता, कमलेश कुमार यादव, श्रीनिवास तिवारी एवं दिनेश कुमार दूबे जैसे नाम शामिल हैं।यह नोटिस न केवल अधिवक्ताओं को व्यक्तिगत रूप से दिया गया है, बल्कि इसकी प्रति एडवोकेट ग्रुप और अन्य मीडिया माध्यमों से सार्वजनिक भी की जा रही है, ताकि बार की गरिमा बनाए रखने के लिए कोई भ्रम या असमंजस की स्थिति न रहे।

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