गिरीश तिवारी /AKD
सोनभद्र/वाराणसी। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च (गुरुवार) से हो रहा है, जो 27 मार्च तक पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस बार नवरात्रि का पर्व विशेष संयोगों के कारण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त आचार्य प्रशान्त मिश्र (वैदिक) के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 6:47 बजे से 9:02 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:53 बजे तक रहेगा, जो अत्यंत शुभ माना गया है।72 साल बाद बना दुर्लभ संयोग इस वर्ष एक विशेष संयोग बन रहा है कि कलश स्थापना के समय अमावस्या का प्रभाव रहेगा। आचार्यों के अनुसार ऐसा संयोग लगभग 72 वर्षों बाद देखने को मिल रहा है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।मां दुर्गा का आगमन पालकी में इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी में हो रहा है, जिसे शास्त्रों में कष्टकारी संकेत माना गया है। इसके बावजूद श्रद्धा से पूजा-अर्चना करने पर मां भगवती सभी बाधाओं से रक्षा करती हैं और भक्तों को शक्ति प्रदान करती हैं।नौ दिनों तक नौ रूपों की आराधना नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से शुरुआत होती है, इसके बाद क्रमशः ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और अंत में सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवरात्रि का समापन होता है। धार्मिक महत्व और मान्यता शास्त्रों के अनुसार प्रतिपदा तिथि को सृष्टि की रचना का प्रारंभ माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की शुरुआत की थी। चैत्र नवरात्रि का मुख्य उद्देश्य शक्ति की उपासना कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करना है। इस दौरान देवी पूजा से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
Author Profile

Latest entries
Breaking_NewsMarch 18, 2026रिश्वतखोरी का पर्दाफाश, 50 हजार लेते संविदा कर्मी रंगे हाथ गिरफ्तार: एंटी करप्शन का बड़ा ट्रैप
उत्तर प्रदेशMarch 18, 2026चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरुआत, 72 साल बाद बना दुर्लभ संयोग
सम्पादकीयMarch 18, 2026तेज रफ्तार ट्रेलर की टक्कर से युवती की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया सड़क जाम
Breaking_NewsMarch 17, 2026प्रेमी का हाई वोल्टेज ड्रामा, चढ़ा टावर पर