सोनभद्र। वर्ष 2017 के चूना-पत्थर और पत्थर खदान आवंटन से जुड़ी अनियमितताओं पर आखिरकार प्रशासनिक शिकंजा कस गया है। खनन कार्यों में बरती गई लापरवाही और प्रक्रिया में ढिलाई को गंभीर मानते हुए भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने सात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।जांच में सामने आया कि जिन खदानों का संचालन वर्ष 2019 तक शुरू होना था, उनके संचालन और समयसीमा विस्तार को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कोई प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा। इस लापरवाही के चलते खदानों का संचालन समय पर नहीं हो सका और शासन को नुकसान उठाना पड़ा।कार्रवाई की जद में चार ज्येष्ठ खनन अधिकारी और तीन खनिज मुहर्रिर शामिल हैं। इनमें तत्कालीन ज्येष्ठ खनन अधिकारी जेपी द्विवेदी के साथ महेंद्र चंद्र प्रकाश तिवारी, कमला शंकर उपाध्याय और सुनील कुमार के नाम शामिल हैं, जबकि कल्लोलिनी चौबे, कमलेश कुमार राय और आशीष कुमार जैसे कर्मचारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं।मामले में मंडलायुक्त मिर्जापुर की विस्तृत आख्या के आधार पर यह कार्रवाई की गई है, जिसमें अधिकारियों की शिथिलता और गंभीर लापरवाही को स्पष्ट रूप से उजागर किया गया था। विभागीय कार्रवाई शुरू होते ही खनन विभाग में हलचल तेज हो गई है और संकेत मिल रहे हैं कि आगे इस मामले में और भी परतें खुल सकती हैं।
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