ललितपुर। एक बुजुर्ग नेत्रहीन ग्रामीण जब एक डंडे के सहारे जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचा, तब पता चला कि वह पेंशन भोगी ग्रामीण है जिसकी पेंशन विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही से किए गए सत्यापन से बंद हो चुकी है और वह अपनी पेंशन सुचारु करवाने के लिए डीएम के पास अपने जिंदा होने का प्रमाण पत्र लेकर आया है । क्योंकि कर्मचारियों ने उसे दस्तावेजों में मृत दर्शाकर उसकी पेंशन बंद करवा दी जिससे उसे अपना भरण पोषण करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विकासखंड बिरधा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम गढ़ोली निवासी नेत्रहीन ग्रामीण जगन सहरिया पुत्र अर्जुन सहरिया ने जिला अधिकारी के नाम शिकायती पत्र देकर गुहार लगाई कि साहब मैं अभी भी जिंदा हूं, लेकिन आपके कर्मचारियों ने मुझे दस्तावेजों में मार दिया, जिससे मुझे बृद्धा पेंशन प्राप्त नहीं हो पा रही और मेरी अजीबिका भी नहीं चल पा रही है। डीएम को दिए गए शिकायती पत्र में पीड़ित ग्रामीण में अवगत कराया है कि वह नेत्रहीन बृद्ध ग्रामीण है और बहुत ही गरीब वर्ग का है जिसे चलने फिरने और अपना काम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अपनी अजीबिका चलाने के लिए उसे दिव्यंका के आधार पर पेंशन प्राप्त होती थी जो सेंट्रल बैंक के खाते में पहुंचती थी लेकिन सत्यापन के दौरान आपके ही विभागीय अधिकारी कर्मचारियों ने उसे अमृत दर्शाकर उसकी दिव्यांग पेंशन बंद करवा दी जिससे उसे अपना जीवन यापन करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि पेंशन के अलावा उसके पास आए का कोई जरिया नहीं है इसीलिए मैं अपने जिंदा रहने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर रहा हूं कृपया मेरी दिव्यांग पेंशन को पुनः सुचारु करने का कष्ट करें ताकि मुझे अपना जीवन यापन करने में परेशानियों का सामना न करना पड़े। गौर तलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है जिसमें अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही के कारण जिंदा व्यक्ति को मुर्दा दर्शा दिया गया हो इसके पहले भी कई मामले संज्ञान में आते रहे हैं लेकिन सक्षम अधिकारियों द्वारा ऐसे दो से अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई जाती जिससे अधिकारी कर्मचारी सत्यापन के दौरान काफी लापरवाही भरते हैं जिसका खामियाजा ऐसे लोगों को बताना पड़ता है अब इस मामले में देखने वाली बात है होगी कि जब व्यक्ति सामने जिंदा खड़ा है और कर्मचारियों में उसे मुर्दा दर्शा दिया तो फिर प्रशासनिक अधिकारी उसे कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्यवाही अमल में लाते हैं या फिर पहले की तरह ही इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
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