सोनभद्र :(अरविंद दुबे,गिरीश तिवारी)-
प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक परंपरा और योग की सुगंध से समृद्ध सोनभद्र ज़िले में आज नशे का अंधकार गहराता जा रहा है। जिन गलियों में कभी सुबह योग और भजन की गूंज सुनाई देती थी,वहां अब नशे की तस्करी और माफिया संस्कृति अपनी जड़ें जमा रही है,नशे के कारोबार से जुड़े कई चेहरे आज आलीशान ज़िंदगी जी रहे हैं। शहर के पॉश इलाकों और कस्बों के किनारों पर करोड़ों की कीमत वाले पक्के मकान, कई बीघा ज़मीन, लक्ज़री गाड़ियां, और टूर – यह सब उनकी ‘कमाई’ का हिस्सा बन चुका है।सूत्रों की मानें तो कुछ नशा कारोबारियों ने भोले-भाले आदिवासियों,किसानों की ज़मीनें औने-पौने दाम पर खरीद लीं और वहां बंगले खड़े कर दिए।चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई नशा व्यापारी खुद को नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यवसायी बताकर अपना असली चेहरा छिपा लेते हैं। उनके सोशल मीडिया पर हाई-फाई तस्वीरें आम लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रही हैं।
संपन्न जीवन, अधूरी आत्मा:
नशे का कारोबार करने वाले तथाकथित ‘सौदागर’ ऐशोआराम की जिंदगी जी रहे हैं। लग्ज़री गाड़ियों में घूमना, फाइव स्टार होटलों में रहना, सोने की चेन और महंगे गैजेट्स – यही इनकी पहचान बन चुकी है। ये सौदागर बाहर से भले ही ‘हाई-फाई’ दिखते हों, पर भीतर से इनका जीवन शांति और संतुलन से कोसों दूर है। योग कहता है – “वैराग्य और अभ्यास से चित्त की वृत्तियों का निरोध होता है”, लेकिन ये लोग सांसारिक लालच में फंसकर न सिर्फ अपना पतन कर रहे हैं, बल्कि पूरे समाज को अंधकार की ओर धकेल रहे हैं। जनपद में औद्योगिक पहचान रखने वाले नव सृजित नगर पंचायत डाला नगर पंचायत में जहां सरकार विकास के हर पैमाने को ध्यान में रखते हुए नगर पंचायत के विकास को गति दी जा रही है, किंतु नशे के सौदागरों द्वारा अपने निजी हित में युवाओं के सपनों का खून किया जा रहा है पर आज भी लगाम उस हद तक उनके इस मंसूबे पर नहीं लग सकी। जहां एक ओर बेहतर सुशासन को लेकर योगी सरकार को जाना जाता है जिसमें की यह सच है आज माफियाओं का वह दौरा जो कुछ दशक पहले तक था नहीं देखा जा रहा। भले ही यूपी के कुछ थानों में अपराधी अपराध को छोड़ आत्म समर्पण कर रहें किंतु बात अगर यूपी के आखिरी जनपद सोनभद्र के चोपन थाना स्थित के डाला चौकी क्षेत्र की करें तो यह कहानी यहां कुछ और ही दिखती है। आखिर पुलिस की पहुंच से यहां कैसे दूर रह जा रहे नशे की तस्करी करने वाले यह बात हर किसी को हैरान करती है। देखना यह है कि आने वाले दिनों में भी इनपर कोई नकेल कसी जाती है या फिर युवाओं को नशे के दलदल में और जाता देखा जाएगा यह तो आने वाला दौर ही बताएगा।
प्रशासन पर उठते सवाल:
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं – “जब सब कुछ सामने है, तो कार्यवाही क्यों नहीं होती?” कुछ नाम सामने आ चुके हैं, लेकिन कार्रवाई अब भी अधूरी है। पुलिस विभाग को कठोर कदम उठाने होंगे।

धन्वंतरि पतंजली योग संस्थान के संस्थापक योग गुरू आचार्य अजय कुमार पाठक से बातचीत के दौरान उन्होने पब्लिक भारत न्यूज से कहा कि– “हम योग के रास्ते पर हैं, लेकिन नशे के धंधे को यूं खुला नहीं छोड़ सकते। यदि प्रशासन नहीं जागा, तो लोग खुद मोर्चा खोलेंगे।” जनपद को फिर से योग, साधना और संस्कृति की भूमि बनाना होगा। इसके लिए सबसे पहले उस ज़हर को जड़ से खत्म करना होगा जो आज स्वर्णिम भूमि को काले कारोबार से ढक रहा है।
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