सोनभद्र। प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर जिले के सभी विकास खण्डों में आज ग्राम पंचायत अधिकारियों का क्रमिक सत्याग्रह आंदोलन शुरू हो गया। यह सत्याग्रह जिलाध्यक्ष मनोज दुबे कि अध्यक्षता में शुरू हुआ। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के समस्त विकास खण्डों में ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी क्रमिक शांतिपूर्ण सत्याग्रह आंदोलन पर बैठ गए हैं। सूत्रों कि माने तो यह आंदोलन विभिन्न लंबित मांगों और कार्यभार संबंधी समस्याओं को लेकर किया जा रहा है, जिसके लिए संघ ने विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। जिसमे सबसे पहले सभी ग्राम पंचायत सचिवों को “10 सूत्रीय अनुरोध ज्ञापन” की दो प्रतियां सादे कागज पर तैयार करनी हैं। आंदोलन कर रहे लोगों ने ने बताया कि यह ज्ञापन मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार तथा मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को संबोधित होगा। सभी सचिव अपने नाम व पदनाम के साथ ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे और उसके बाद दोनों प्रतियों का PDF तैयार करेंगे। ज्ञापन तैयार होने के बाद संबंधित खण्ड विकास अधिकारी को यह ज्ञापन सौंपा गया। इसके साथ ही PDF को निर्धारित मेल आईडी पर भी भेजा गया।

आंदोलन कर रहे लोगो ने बताया कि यह सत्याग्रह आंदोलन संयम, अनुशासन और शांतिपूर्ण माहौल में चलेगा सत्याग्रह के तहत सभी सचिव सुबह 11:00 बजे से अपने-अपने विकास खण्ड परिसर में पहुंचकर निर्धारित स्थान पर दरी/चादर बिछाकर बैठेंगे। परिसर में संघ की ओर से बैनर/फ्लैक्सी लगाई जाएगी, जिसमें विकास खण्ड का नाम स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

संबोधन के दौरान पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग संभव है, लेकिन उसकी ध्वनि इतनी कम रखी जाएगी कि कार्यालय कार्यों या आम नागरिकों को कोई परेशानी न हो। सभी वक्तव्य शालीन और संसदीय भाषा में होंगे। साथ ही जन चौपाल दिवस भी जनता से संवाद जारी रहेगा जिले के प्रत्येक विकास खण्ड की दो ग्राम पंचायतों में “जन चौपाल दिवस” भी आयोजित है। सभी संबंधित ग्राम सचिव दो घंटे चौपाल में रहकर जनता की समस्याएं सुनेंगे और आवश्यक कार्यवाही करेंगे। इसके बाद चौपाल की जिम्मेदारी पंचायत सहायक या प्रतिनिधि को सौंपकर सचिव पुनः सत्याग्रह में शामिल होंगे। इसके साथ ही आंदोलन कर रहे लोगों ने कहा कि खण्ड विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद सभी सचिव जिला और विकास खण्ड स्तरीय शासकीय व्हाट्सएप ग्रुप से लेफ्ट हो जाएंगे। सचिवों के ग्रुप छोड़ने के पश्चात पदाधिकारी भी स्वयं को ग्रुप से अलग करेंगे। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में लौटकर शासकीय दायित्वों का निर्वहन करेंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा।

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