गिरीश तिवारी /AD
सोनभद्र। त्योहारों के संवेदनशील माहौल के बीच जनपद की राबर्ट्सगंज कोतवाली में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब दोपहर के समय अचानक सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष थाने के भीतर पहुंच गए। न कोई पूर्व सूचना, न कोई अनुमति — देखते ही देखते कोतवाली परिसर धरना स्थल में तब्दील हो गया। भीड़ इतनी बड़ी थी कि पुलिस महकमा भी कुछ पल के लिए सन्न रह गया। रमजान और होली जैसे बड़े त्योहार सामने खड़े हैं, ऐसे में पुलिस पहले से ही अलर्ट मोड पर है। लेकिन एकाएक इतनी भीड़ का थाने में घुस जाना, वो भी बिना स्पष्ट नेतृत्व और बिना ठोस एजेंडे के, अधिकारियों के लिए चौंकाने वाला था।

इस समाज की मौजूदगी….
जानकारी के मुताबिक मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली जिलों से बड़ी संख्या में कोल, खरवार और गौड़ समाज के लोग पहुंचे थे। महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कई लोग जमीन पर बैठ गए और कोतवाली परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि भीड़ में शामिल कई लोगों को खुद यह स्पष्ट नहीं था कि वे कोतवाली क्यों आए हैं। कुछ ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया, कुछ ने जंगल की जमीन के विवाद की बात कही, तो कुछ लोग केवल “समाज के कहने पर” भीड़ का हिस्सा बन गए।
प्रेसवार्ता के बीच बढ़ी हलचल
उसी समय कोतवाली परिसर में अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार और उप पुलिस अधीक्षक रणधीर मिश्रा एक अन्य मामले में प्रेसवार्ता कर रहे थे। अचानक भीड़ के पहुंचने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी तत्काल भीड़ के बीच पहुंचे और लोगों से बातचीत कर स्थिति को समझने की कोशिश की। शुरुआती क्षणों में पुलिस को यह समझने में दिक्कत हुई कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोग किस मुद्दे को लेकर इकट्ठा हुए हैं।

पुलिस ने संभाला मोर्चा
अचानक उमड़ी भीड़ से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। त्योहारों के मद्देनजर पहले से चौकन्नी पुलिस ने संयम दिखाया। किसी भी तरह की बल प्रयोग की स्थिति नहीं बनने दी गई। अधिकारियों ने लोगों को समझाया- बुझाया और स्पष्ट किया कि किसी भी विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने भीड़ को शांत कराया और सभी को वापस घर भेज दिया। स्थिति अब नियंत्रण में बताई जा रही है।
बड़ा सवाल……
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना स्पष्ट मांग और बिना संगठित नेतृत्व के इतनी बड़ी भीड़ को किसने और क्यों बुलाया? क्या यह किसी गलतफहमी का नतीजा था या फिर किसी ने भोले-भाले ग्रामीणों को गुमराह किया? त्योहारों के संवेदनशील समय में इस तरह की भीड़ प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। हालांकि पुलिस की तत्परता से हालात बिगड़ने से बच गए, लेकिन यह घटना कई सवाल छोड़ गई है। सोनभद्र की राबर्ट्सगंज कोतवाली में घटी यह घटना साफ संकेत दे रही है कि जमीन और पट्टे के मामलों में जागरूकता की कमी और दलालों की सक्रियता आम लोगों को भ्रमित कर रही है। अब जरूरत है सख्त जांच की — ताकि सच सामने आए और भविष्य में ऐसी भीड़तंत्र की स्थिति दोबारा न बने।
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